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Anilkumar Rathwa (Sameer)

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My Articles

(Verse 1 – Soft) चल पड़े हैं रास्ते फिर से पुकारते, टूटे सपने भी आज साथ चल पड़े। धूप है तो क्या हुआ, छाँव बन के तू बढ़, हार के भी जीता है, जो खुद से क read more >>
लक का तो पता नहीं, पर किस्मत भी झुक जाती है हौसलों के आगे, जो चलते रहते हैं चुपचाप, मंज़िल लिख देती है उनका नामे-भाग्य के पन्नों पर। धूप read more >>
थक जाना गुनाह नहीं, पर रुक जाना हार है। गिरकर बैठ जाओ तो लोग पूछेंगे— “कितना कमजोर ये असर है?” पर जब फिर उठकर चलोगे, तो वही लोग कहेंगे— read more >>
परिणाम चाहे जो भी हो, प्रयास करते रहना हमारा कर्तव्य है, राहें मुश्किल हों तो क्या, चलते रहना ही असली ऊर्जा है। हार-जीत तो बस पल भर की ब read more >>
काम करो ऐसा कि एक पहचान बन जाए, हर कदम यूँ बढ़ो कि निशान बन जाए। यहाँ तो साँसें सब ले लेते हैं ज़िंदा रहने को, ज़िंदगी जियो इस तरह कि मिस� read more >>
बदल जाओ वक़्त के साथ, या फिर वक़्त बदलना सीखो, राहें आसान नहीं होतीं, पर मंज़िल तक चलना सीखो। शिकायतों से कुछ न होगा, हर हाल में मुस्का read more >>
(Verse 1) क्यों रुका है, क्यों डरा है, ज़रा खुद को पहचान ले रास्तों पे धूल है गर, कदमों में तू जान ले तेरी मंज़िल आसमाँ है, ज़मीं से ना बंधा रह � read more >>
जहाज़ तब तक नहीं डूबता, जब तक उसमें कोई सुराख न हो, इंसान भी तब तक मजबूत रहता है, जब तक वो खुद को बेपर्दा न हो। हर मुस्कान के पीछे एक कहान read more >>
मुट्ठी में है आसमान, निगाहों में है जीत, भारत की बेटियाँ लिखेंगी फिर एक नई प्रीत। मैदान में गूंजेगा नाम, “इंडिया! इंडिया!” का, हर चौका ब� read more >>
अकेले खड़े होने का साहस रखो, चाहे सारी दुनिया विरोध में क्यों न हो। सच की राह कठिन सही, पर उजली होती है, डर की हर दीवार वहीं ढह जाती है, जह read more >>
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