Anilkumar Rathwa (Sameer) 09 Nov 2025 गीत समाजिक Motivational Song 30312 0 Hindi :: हिंदी
(Verse 1) क्यों रुका है, क्यों डरा है, ज़रा खुद को पहचान ले रास्तों पे धूल है गर, कदमों में तू जान ले तेरी मंज़िल आसमाँ है, ज़मीं से ना बंधा रह जोश की आवाज़ सुन, सपनों से तू अब सनद ले। (Chorus) उठ, चल, उड़ान भर, तू ही तेरा साहिल है हर लहर को चीर के निकल, मंज़िल तेरी हासिल है। डर को तू आज़मा ले, ये बस एक परछाई है सूरज सा चमकना है, ये तेरी सच्चाई है। (Verse 2) हार में भी जीत का इक छोटा सा इशारा है हर गिरे हुए लम्हे में नया इक किनारा है दर्द जो भी दिल में है, उसे तू अब हथियार कर चुनौतियों से दोस्ती, खुद पे ऐतबार कर। (Chorus) उठ, चल, उड़ान भर, तू ही तेरा साहिल है हर लहर को चीर के निकल, मंज़िल तेरी हासिल है। डर को तू आज़मा ले, ये बस एक परछाई है सूरज सा चमकना है, ये तेरी सच्चाई है। (Bridge) ये वक़्त है तेरा, इसे यूँ ही न खोने दे मेहनत का पसीना अब मोती सा चमकने दे राहें खुद बनेंगी, तू बस चलना शुरू तो कर दुनियां सलाम करेगी, तू अपने दम पे खड़ा हो कर। (Outro) रुकना नहीं है अब, झुकना नहीं है अब आँखों में आग भर, बस चलते जाना है... चलते जाना है... हाँ!