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Anilkumar Rathwa (Sameer)

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My Articles

आज हर किसी को भगवान बनना है, पर किसी को इंसान बनना नहीं है। सबको राम जैसा सम्मान चाहिए, पर मर्यादा की लकीर नहीं चाहिए। सबको कृष्ण की म read more >>
हे… माँ, मुझे माफ़ करना, मैं तेरे आँचल की छाँव का पूरा हिसाब कभी नहीं लिख पाया। तेरी नींद बेचकर जो सपने मेरी आँखों में डाले थे, उनका ब् read more >>
आज के युग में लोग जाति के नाम पर लड़ रहे हैं, पर उन्हें क्या खबर… कि वे अपने ही समाज से दूर हो रहे हैं। भाई-चारे की डोर अब नफरत से टूट रह� read more >>
पिता का हाथ कंधे पर हो, तो हालात डराया नहीं करते। आँखों में अगर उनका भरोसा हो, तो तूफ़ान रास्ता बदल लिया करते। दुनिया झुकाने आए तो आने read more >>
जेब में बसा मालिक जेब में रखते हैं, पर ये हमें चलाता है। हम उँगलियाँ चलाते हैं, और ये हमारा दिमाग़ खाता है। चाय गिरी, बच्चा रोया, पर री� read more >>
जिस देश में गंगा बहती है, संतों का जहाँ निवास, वीरों की धरती वह भारत, है मेरा गर्व, है मेरा विश्वास। जहाँ खेतों में सोना लहराता, मेहनत � read more >>
मतला: कभी-कभी ख़ामोशी भी बयान बन जाती है, हर अनकही सी बात पहचान बन जाती है। लबों पे जो न आए, वो नज़र कह जाती है, चुप्पी भी दर्द की ज़ुबान � read more >>
लेकर निकला था खिलौनें का पहिया, साफ़-सुथरे रास्तों पर। क्या पता था — जीवन का पहिया कीचड़ और दलदल रौंदकर ही आगे बढ़ता है। बचपन में, हर read more >>
एक दिन मैं गया जूतों के शहर में, भीड़ थी भारी, हर एक पहर में। कहीं बूट चमचमाते, कहीं चप्पल मुस्काती, कहीं सँडिल की अदाएँ, दिल को लुभाती। read more >>
एक दिन मैं गया जूतों के शहर में, भीड़ थी भारी, हर एक पहर में। कहीं बूट चमचमाते, कहीं चप्पल मुस्काती, कहीं सँडिल की अदाएँ, दिल को लुभाती। read more >>
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