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Samir Lande

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लाखों की भीड़ में आंखों की बात, किसे समझ आती है। मिले किसी का हाथ, तो यह जिंदगी यूं ही कट जाती है। कवी - समीर लांडे read more >>
किसी बेहतर की तलाश तुझे, ले डूबे गी फराज तुझे। आईने में देख जरा, कहते हो रकीब किसे। लेखक - समीर लांडे read more >>
मैं शाख से गिरा पत्ता हूं, फटा किताब का पन्ना हूं। उस सुखी नदी का कंकड़ में, किस काम का में लड़का हूं। कवी - समीर लांडे read more >>
डोळ्यातील पाण्याचं काय ते तर केव्हा ही येत , कधी रडताना तर कधी हस्ताना ही येत. मानस जपता आली तर जपून घ्यावीत, नसेल येत तर शिकून, नाहीतर � read more >>
में पीस रहा हूं जैसे मसाला कोई, मसला ये है की पीसने वाला है अपना कोई। कवी - समीर लांडे read more >>
मैं किसिका खास नहीं, ना समझे मेरा एहसास कोई। सुबह की ओस सा मैं हूं सही, तुझे देखा तो जाना मैंने हर कोई कोसने वाला नहीं। तू है कोई जो समझ read more >>
प्रत्येक रातीला तुझ्या , आठवणींची लाट येते. वहीच्या पानावर तुझ्याच , चेहऱ्याची छाप येते. स्पर्श त्या छापेचा , मला गगनात नेतो. तू नसता� read more >>
में कमजोर हूं गिनती में, तुझे आज भी अपनो में गिन लेता हुं। और हिसाब लगाने पर, पता चला में नुकसान में रहता हूं। कवी :- समीर लांडे read more >>
जहर जिंदिगी का एक साल और कट रहा है, है कोई जो हम से अलग बट रहा है। वो दौलत लूटे मेरी तो क्या गम होता, में फकीर हूं ये दुःख मुझे अंदर से चाट � read more >>
जरा झुक कर ले सलाम देख अब्बा जान तेरे हाज़िर है, ना में भगवान मेरा नाम शैतान ही काफ़ी है। Bak bak लगे मेरी Rhymes इसे, तु क्या समझेगा गांडू काति� read more >>

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