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संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

@ sandeep-kumar-singh
, Bihar

I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me.

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(दोहा छंद) अपनी अपनी सोच है, रखूं नजरिया साफ। गुण को सदा कबूल कर,करता हूं इंसाफ।। अपना बल है एकता, हर बाधा कर नाश। आगे ही आगे बढूं, छूं ल� read more >>
(दोहा छंद) मुझे मिली है कामनी,हुआ परिवार स्वर्ग। दौलत अब नित ही बढ़े,लिखता हूं अरु सर्ग।। चमकी जब भी दामनी,उत्सुकता हो खास। नजर गगन को read more >>
(दोहा छंद) भिक्षा देना पुण्य है,होगा बड़ा प्रताप। मिले दुआ भी आप को,रहे नहीं संताप।। शिक्षा का जब साथ हो,जीवन यह वरदान। दिक्कत सब गायब read more >>
(दोहा छंद) ऋषि मुनियों की यह धरा,भारत देश महान। सदा शांति उपदेश दे,जाने सकल जहान।। रहे खुशी परिवार में,अनुपम है यह धाम। सभ्य बनाए ये ह� read more >>
(दोहा छंद) भारत देश महान है, दया शांति पैगाम। अति सुन्दर इतिहास है,प्रगति प्रेम है काम।। सदा कर्म पर ध्यान हो,अदभुत बने सुजान। दुनिया read more >>
(दोहा छंद) मुझको तुमसे प्यार है,तुम हो दिव्य सवाल। तुम ही मेरी हो जहां,करती दूर बवाल।। चिन्तन तेरी मैं करूं,तेरा बनूं जवाब। तेरी हर उम read more >>
मुक्तक छंद "सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" आज रात है अति खुशी,होगा भव्य विवाह। हृदय मिलेंगे झूम कर,होगी नूतन चाह। खुशियों की बरसात से,महफ� read more >>
कुंडलिया छंद "सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माया से संसार है,सबका अपना दाम। खुद को तुम अति योग्य कर,करिए सुंदर काम।। करिए सुन्दर काम,समा read more >>
_कुंडलिया छंद "सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माया में सब लीन है,भूल गए हैं मूल्य। सब रह जायेगा यहीं,जाओगे बन शून्य।। जाओगे बन शून्य,जन्म � read more >>
मुक्तक छंद "सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" लालच जो मैं किया, बुरा हुआ तब हाल। छूटा सब दोस्त है,गड़बड़ है अब काल। बस पछतावा मिले, कुछ कर नही� read more >>

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