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संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

@ sandeep-kumar-singh
, Bihar

I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me.

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मुक्तक साधु बना शैतान है,संकट में है आन। किसको कहोगे अब सही,हैरत में है जान। कागा मोती चुग रहे,दाना खाए हंस-- समय समय का फेर है,साँप � read more >>
खोई यह सरकार है ,खोई मन की लाज। हैरत में अब सांस है,बदतर है अब आज। मर्यादा लज्जित हुई,सीमा है लाचार-- अगर रहे यह हाल तो,बिक जायेगा ताज l read more >>
मुक्तक अगर जलो कंदील सा,छू लो तुम आकाश l ज़िगर रखो फौलाद का, देते चलो प्रकाश l डरते तो कायर यहाँ, रखो लगन जब साथ_ करो फतह तब हर किला,नही� read more >>
ग़ज़ल 212,212,212,22 सत्य जलता नहीं है जलाने से। पाप धुलता नहीं है नहाने से। प्यार है तो खुशी है जहाँ में बस। जिन्दगी कुछ नहीं है सतान read more >>
सावन का महीना अति अच्छा लगता है। सोये अरमान भी अभी जाग उठता है । बावले सावन के बादल सबको भाये । बरसे तो दर्द भूला सबको मुस्का� read more >>
लड़ना बढ़ना है तुझे,जीत यहां सब जंग। खुद पर हो विश्वास जब,जीने में तब रंग। यहाँ गीरते हैं सभी,बढ़ते हैं जाँबाज़ _ कल तुझ पर जो थे हसे,आज read more >>
पत्थर से प्यार किया नादान थे हम l गलती हम से हुई इंसान थे हम l आज बात तक करना नहीं चाहती है_ य़ारों कभी उसके दिलो जान थे हम ll (स्व� read more >>
चाहत कभी न यूं मरे, बड़े स्वप्न को देख। जिन्दा दिल हर पल रहें, प्राण बने नव लेख।। प्राण बने नव लेख,जिसे पढ़कर सब सीखे। और करे उत्कर्ष,रह read more >>
प्रीति है इस जहाँ से, प्रेम और श्रधा भी है। निर्मल हृदय मचल_ मचल कह रही है, थोड़ा और जीने दे मुझे। बहुमूल्य जीवन साथ में सुन्दर read more >>
किसके मन में क्या छिपा हुआ,मजेदार यह बात। जान सके कोई देव नहीं,किसकी है औकात। भेद सृष्टि की तो इसमें ही,कहते हैं भगवान-- जितना समझ read more >>

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