क्या कहु ये आँखे क्यू तु आज भी रोता है, जब दर्द अपनो ने ही दिया है फिर क्यो पिरोता है।कुछ तो मजबूरिया होगी उनकी भी जो तुझे दर्द दे गया, उस � read more >>
#बहर:-122 , 122, 122
#काफिया:-ई
#रदीफ़:- कहानी
ग़ज़ल
हमारी अधूरी कहानी,
बनी है गजब ही कहानी.
कहूँ जो इसे तो सुने सब,
सकूं ले करारी कहानी.
हम� read more >>
समझते हैं लोग क्यों-
हम अलग हैं आपसे,
समझते हैं लोग क्यों...
जीवन की चाह दिया-
चाहो जी भर के,
जियो जी भर के...
समझते हैं लोग क्यों-
हम अलग ह read more >>