प्रिय!
इन बदलती हवाओं के रुख के!
साथ मैं भी कुछ बदलती जा रही हूं!
मैं भी समय के साथ कदम! मिलाकर कुछ दूर चलती जा रहा हूं !
पर यह न सोचना यह स� read more >>
समय गुजरता ही गया हम कहां से कहां आ गए!
न जाने कब बचपन बीता, जवानी गुजरी ,इन हाथों से उम्र के कई वर्ष गुजरे!
पता ही न चला, हम कहां से कहां आ � read more >>
इश्क की गलियों से होता हुआ
कितनी रसाकसी के बाद आज
पहुंचा हूं मुकाम पे....!
बहुत कुछ मिलने की उम्मीद में
सब कुछ गवा वैठा हूं...!
राह बदर रा� read more >>
हम धरती के वो पुतले हैं,
जो उड़ने की हिम्मत रखते हैं,
अपने आप को छोड़कर हम,
वतन को छुड़ाने की हिम्मत रखते हैं,
शोर हुआ था गलियों में हमार� read more >>