काया माटी की, ये तो सब जाने,
पर भीतर छुपा कोई और खजाना।
ना कोई रंग, ना कोई आकृति,
वो शुद्ध चेतना है, अमर ज्योति।
हर जीव में समाया वो परम स read more >>
सलाम-ए-कायनात-ए-कमाल को
तू है कामिल रचा-ए-हयात को
ये अर्ज़-ए-नियाज़-ए-मुहब्बत भी क्या है
बढ़ा दे तू अब मेहर-ओ-सौग़ात को
सलाम-ए-कायनात-ए-� read more >>
सपनों से किया प्यार..
रचना -प्रतिभा खडेकार
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,,,,,,,,, सपनों से किया प्यार
,,,,,,,,, अपनों ने दिया है ठुक� read more >>
गीत(मुखड़ा)
मेरे मन के अंँधेरे में, तू ही तो रोशनी है
जीवन के हर मोड़ पर, तेरी ही बंदगी है
दिल की आंँखों से देखूंँ, बस तुझको हरदम
तू ही म� read more >>