SHUBHAM PATHAK 01 Oct 2025 गीत प्यार-महोब्बत Jindgi 23127 1 5 Hindi :: हिंदी
उधार की मुलाक़ात रहने दो उधार एक मुलाक़ात यूँ ही, कभी तो दिलों का हिसाब जुड़ ही जाएगा। सुना है उधार वालों को भुलाया नहीं जाता, ये वादा भी शायद याद रह जाएगा। पलों का उधार, निगाहों का कर्ज़, बातों का ब्याज, मुस्कान का मोल— ये सब जोड़ते-जोड़ते ज़िंदगी की किताब में, एक रिश्ता अनजाना सा खुल ही जाएगा। कभी वक्त चुकाएगा ये उधारी, कभी यादों की किश्तें भरेंगी कमी। एक दिन फिर उसी मोड़ पर मिलेंगे हम, जहाँ ठहरी थी वो अधूरी घड़ी। तो रहने दो ये सौदा अधूरा अभी, दिल को बहाना चाहिए जीने का कभी। उधार की ये मुलाक़ात भी क्या कम है, जो यादों में अमर हो गई अभी। ✍️✍️✍️ शुभम पाठक ✍️✍️✍️
4 months ago