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गीत
हम तो दोस्त आपके पुराने हो गए
गली के गँवार आशिक दिवाने हो गए, अब हमसे क्या आपका मतलब रहेगा, हम तो दोस्त आपके पुराने हो गए।। पहले मेरी हाँ से महफिल सजा करते थे, मेरी
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मुझे, प्यार मे तेरे जीना है
कह दो, लोगों से कह दो।,..... 2 ये प्यार का, महीना .2..3 मुझे प्यार मे, तेरे जीना है । भीगे जाए चाहे, मेरा अगं -अगं भर जाऐ,इन जुल्फों कोई रंग य�
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दोहा गीत
रखें विश्वास आप पर,इच्छा सब हों पूर्ण। अटल हृदय में लगन हों,मंजिल मिलती तूर्ण।। पावन विचार से मिले,दुनिया की हर हर्ष। खुशियों में जी�
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धन से ही अब बुद्धि हों,होते हैं सब काम - मुक्तक छंद
धन से ही अब बुद्धि हों,होते हैं सब काम। सभी आस तब पूर्ण हों, दुनिया में हों नाम। दुनिया में हों नाम जब,रखें स्वयं में धार_ सबकी दिक्कत दू
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कोशिश जीने की
जीने की कोशिश न कर, तुझे जीना नहीं आता है। कभी हाथों से जाम न पकड़ना, तुझे पीना नहीं आता है। ये शराबे- इश्क है, जान ले लेती है। लत ऐसी �
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दिवानगी की एक हद थी,
दिवानगी की एक हद थी, उन्हें अपना बनाने की एक मकसद थी। अपने साथ कैद परछाई से, एक बार आजाद होकर के देखो। किसी बेगाने के पीछे, एक बार बरब
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मेरा गांव अभी भी नहीं बदला
शहर की भागदौड़ से बहुत दूर मेरा गांव अभी भी खुले आसमान के नीचे ऐसे ही हरा भरा रहता है पहले की तरह रूप रंग में उसी तरीके से सजा रहता है
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गाँव बेचकर शहर खरीदा, कीमत बड़ी चुकाई है -अनाहिता
गाँव बेचकर शहर खरीदा, कीमत बड़ी चुकाई है। जीवन के उल्लास बेच के, खरीदी हमने तन्हाई है।। बेचा है ईमान धरम तब, घर में शानो शौकत आई है। संत
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नाजनीन है धन परी,मुझसे करती प्यार- दोहा
नाजनीन है धन परी,मुझसे करती प्यार। पायल की धुन है अदा,करे मुझे गुलजार।। नैनों के मधु तीर से,घायल करती फैन। शायद मुझको चाहती,दिल से दि�
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आगम मेरे सामने,खुशियाँ नव्य हजार- दोहा
आगम मेरे सामने,खुशियाँ नव्य हजार। कारण करता मैं भला,लेकर दिव्य विचार।। निर्गम नाला दृढ़ रहे,रहता दूर जमाव। होता मत पंक सामना,टूटे न�
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खोया सपना में रहूं,मिले अत्यधिक हर्ष- दोहा
खोया सपना में रहूं,मिले अत्यधिक हर्ष। करता सतत प्रयत्न मैं,प्राण करे उत्कर्ष।। अपना अपना ख्याल है, जीवन है संग्राम। सावधान हम सब रह�
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करें कर्तव्य पूर्ण जब, घर में तब हो शांति -दोहा
करें कर्तव्य पूर्ण जब, घर में तब हो शांति। सबके मुख पर हो खुशी,जीवन में हो कांति।। वन वन भटके राम जब,किए मनुज कल्याण। रावण का संहार कर,�
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