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क्यों न प्रिय !मैं तुम्हें पहचान पाई क्यों ?मैं सब कुछ भूल बैठी ! एक तुम्हारी चाह में छोड़कर अपनों के संग आ गई मैं तुम्हारी राह में !क्य� read more >>
छत पर बैठकर चांदनी रात में जैसे मैं चांद को तुम्हें देखती हूंl उसी समय तुम मेरे हृदय में छुपकर ,चुपके से धीरे से ,आकर बैठ जाते हो l उसी read more >>
तुम्हारी इन लवों से- सूर जो खनक रहीं है शहद घोलती ये- बोली बहारों में घुल रही है लहराती- हवा गुनगुना रही है झनकते साजों में- तेरे बो� read more >>
मस्ती में रहना मेरा काम है। यारी करना मेरा शुभ काम है। जीवन सुख दुख का है अनुपम मेल_ जिन्दगी जीना इसी का नाम है। (स्वरचित मौलिक) संदीप � read more >>
प्यार की एक बगिया बनाया हूं, ज़िंदगी एक मिशाल बनाया हूं। भीड़ भरे इस संसार में गम क्यों_ गम को अजी हथियार बनाया हूं। (स्वरचित मौलिक) स� read more >>
करते रहते वाह,सैकड़ों सुख के साथी। अन्दर रखते डाह,दांत रखते सम हाथी। दुख में दे जो साथ,वही सच्चे हमराही_ यही मनुज पहचान,बनो कभी न मनमाथ read more >>
हमसफर मैं तेरे लिए, तूं मेरा है श्वास। जुदा जुदा न कभी रहूं,सदा रहूं हम पास। दीया बाती बन यहां,फैलाऊं नित ज्योति_ सबके आऊँ काम हम,बना रह� read more >>
जिन्दगी ये मेरी, है । माँ तेरी दुआँओ की मँहर ....... तु मूझको , याद किया कर .... रहे सलामत सदा ,तेरा लाल जिए जुग जुग माँ आशीष दिया कर..... न read more >>
हमसफर मैं तेरे लिए, तूं मेरा है श्वास। जुदा जुदा न कभी रहूं,सदा रहूं हम पास। दीया बाती बन यहां,फैलाऊं नित ज्योति_ सबके आऊँ काम हम,बना रह� read more >>
चिंता चिता समान है,सदा करे नुकसान। बस मस्ती में सब रहें,सुन्दर हो पहचान। जीवन पथ पर हम चलें,मिले खुशी बेरोक_ चिंतन अवश्य कीजिए,और बढ़ा� read more >>
अच्छाई की भावना, लाती सदा बहार। बनते दूजे के लिए, अनुपम दिव्य विचार।। अनुपम दिव्य विचार,ज्ञान की ज्योति जलाती। घर घर हो उजियार,दुखों � read more >>
अब मन भाग रहा है संसार की, माया जाल से !जाने क्यों ? अब तक रहा !इस संसार की माया में! उम्र के आखिरी पड़ाव पर न! जाने क्यों ?मन विचलित सा ह� read more >>
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