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बादलों में छुप छुप कर चांद ! मुझे सपने दिखाता क्यों है? चांद की चांदनी! दूर-दूर तक बिखर कर मेरे सपनों को ! जगाती क्यों है ? निराशा के बाद� read more >>
जिन्दगी प्यार, का गीत है। परम् सत्य यह, मधु रीत है । सबके हित में,यह अति खास_ इससे जीवन, में जीत है। जीवन खुशियों, में नित रहे। साहस अद्भ read more >>
सुनता कौन गरीब की,उलझन सबके पास। अपनों में उलझे रहे,छोड़े कभी न आस। जीवन में संग्राम है, होता है अति रोष_ आफत है सबके यहां,जीवन में है ह् read more >>
क्यों न प्रिय !मैं तुम्हें पहचान पाई क्यों ?मैं सब कुछ भूल बैठी ! एक तुम्हारी चाह में छोड़कर अपनों के संग आ गई मैं तुम्हारी राह में !क्य� read more >>
छत पर बैठकर चांदनी रात में जैसे मैं चांद को तुम्हें देखती हूंl उसी समय तुम मेरे हृदय में छुपकर ,चुपके से धीरे से ,आकर बैठ जाते हो l उसी read more >>
तुम्हारी इन लवों से- सूर जो खनक रहीं है शहद घोलती ये- बोली बहारों में घुल रही है लहराती- हवा गुनगुना रही है झनकते साजों में- तेरे बो� read more >>
मस्ती में रहना मेरा काम है। यारी करना मेरा शुभ काम है। जीवन सुख दुख का है अनुपम मेल_ जिन्दगी जीना इसी का नाम है। (स्वरचित मौलिक) संदीप � read more >>
प्यार की एक बगिया बनाया हूं, ज़िंदगी एक मिशाल बनाया हूं। भीड़ भरे इस संसार में गम क्यों_ गम को अजी हथियार बनाया हूं। (स्वरचित मौलिक) स� read more >>
करते रहते वाह,सैकड़ों सुख के साथी। अन्दर रखते डाह,दांत रखते सम हाथी। दुख में दे जो साथ,वही सच्चे हमराही_ यही मनुज पहचान,बनो कभी न मनमाथ read more >>
हमसफर मैं तेरे लिए, तूं मेरा है श्वास। जुदा जुदा न कभी रहूं,सदा रहूं हम पास। दीया बाती बन यहां,फैलाऊं नित ज्योति_ सबके आऊँ काम हम,बना रह� read more >>
जिन्दगी ये मेरी, है । माँ तेरी दुआँओ की मँहर ....... तु मूझको , याद किया कर .... रहे सलामत सदा ,तेरा लाल जिए जुग जुग माँ आशीष दिया कर..... न read more >>
हमसफर मैं तेरे लिए, तूं मेरा है श्वास। जुदा जुदा न कभी रहूं,सदा रहूं हम पास। दीया बाती बन यहां,फैलाऊं नित ज्योति_ सबके आऊँ काम हम,बना रह� read more >>
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