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दर्द भरी जिंदगी हमें सिखा जाती है दुख के वक्त ही अपनो की पहचान होती है जो वक्त में साथ दे वही अपना कहलाती है अच्छे अच्छे को वक्त रोला � read more >>
मज़ेदार पहाड़े 01 नेकी एक एकम एक, नेक बनो भई नेक। एक दूनी दो, न बुरा कहो - न सुनो।। एक तिया तीन, परोपकार में हो लीन। एक चौक चार, अच्छा र� read more >>
मुझसे बच सका न कोई क्या मुझसा नहीं कोई चाहे जो कहते हो खुद को सतनिष्ठ पर बोले है कभी कही पर झूठ बुलताती ह read more >>
उग्र, उद्विग्न भाव, आरोहावरोह मन में। कस्तूरी मृग ज्यूं, भटके कानन में। संयुग्मन, पुनरागमन, वासर, स्वप्न में। वामन से दानव, दानव से व� read more >>
मरता क्या नहीं है करता, जिन्दगी है यह इसके रूप अनेक। किसी पर कब हो जाए मेहरबान, किसी पर कब हो जाए नाराज। जीवन भर लेती रहती कठि read more >>
दोहा छंद परिवर्तन संसार का, सुनो नियम है पार्थ। खाली हाथ आए यहां, जाना खाली हाथ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह ✍️ जिला;'समस्तीपुर( read more >>
दोहा छंद सुख दुख हैं मेहमान जी,स्वागत करना काम। दो ही पहलू सत्य है,कभी सुबह तो शाम।। सुख दुख हैं मेहमान जी, सही सिखाते मर्म। सुख में भ� read more >>
दोहा छंद जलने लगे अलाव अब,ठंढ़ी चारों और। थड़थड़ हैं तन कांपते, नहीं बंधते कौर।। जलने लगे अलाव अब,अमृत तुल्य है आग। बिना आग के जल नही� read more >>
दोहा छंद दूर रहे भ्रम तब सदा,पालें नहीं तनाव। जीवन शैली स्वस्थ हो,गहरा शयन बचाव।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपु� read more >>
मुक्तक छंद मेरे अपने लोग सब, काफी हैं मजबूत। मेरे आते काम में, दौलत जिसे अकूत। इसका मुझे गुमान है,मन भी है गुलजार- आस रखा हूं और read more >>
दोहा छंद मेरे अपने लोग अब, रहते हमसे दूर। कल तक थे साथ में, आज हुए मगरूर।। मेरे अपने लोग ही, हुए बेवफा आज। थे मेरे अहसान पर, अभी ह read more >>
आओ साल का करें विदाई जो आज पुराना, नया कभी था कदम मिला कर ,चला वही था फिर कैसे ना,गम उसका हो आंखे भी नम ना सबका हो छोड़ चला है आज हमें वह � read more >>
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