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कविताएँ
इतनी गजब दिखती हो-तन साँचे में ढ़ाला है
इतनी गजब दिखती हो तन साँचे में ढ़ाला है। मुझे अमर कर दो तूँ अमृत का प्याला है। मेरी ज़िन्दगी पर तुम दिलरूबा अधिकार कर लो- सबसे आग�
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चित्रकूट के राम-संतों का रक्षा किये और जगाये आस
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" चित्रकूट के राम हैं,अद्भुत तुलसी दास। संतों का रक्षा किये,और जगाये आस ।। चित्रकूट के
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चेहरा तेरा एक नगीना है-तूँ खूबसूरत एक हसीना है
चेहरा तेरा एक नगीना है। तूँ खूबसूरत एक हसीना है। देख के तेरे होंठो की लाली- मैं भी अब तेरा दीवाना है । (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार �
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तेरी खुशी मेरी खुशी-तेरा गम मेरा गम
तेरी ख़ुशी मेरी ख़ुशी, तेरा गम मेरा गम, मेरे साथी मेरे हमदम मेरे साथी हमदम। मैं तेरी गलियों का दीवाना हूँ , तूँ एक नगीना है।
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तू मेरा नहीं तो क्या-मैं तो तेरी हो गई
तू मेरा नहीं तो क्या मैं तो तेरी हो गई साथ जिंदगी भर का नहीं तो क्या कुछ पल का ही सही दिल में जो उम्मीद जग गई तो जग गई अब इस पे जोर कहां
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हार जीत-हार के बाद जीतने की खुशी का आनंद आता है
हार के बाद जीतने की खुशी का आनंद आता है, जब हार का डर न हो जीत का मजा नहीं आता, मौत से बचने के बाद जीवन का महत्व अधिक बढ़ जाता। हार का है ड�
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खेत होगा खलिहान होगा -चौड़ी सड़कें घर आलिसान होगा
काव्य रचना - ना कोई इंसान होगा सूरज होगा चांद होगा ये धरा और आसमान भी होगा, पर्वत होगा श्मशान होगा पर मुझे लगता है ये इंसान न होगा। खे
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करते नहीं विचार जो-उल्टे सीधे काम से
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" करते नहीं विचार जो,उसे बुद्धि है भ्रष्ट। उल्टे सीधे काम से,करे प्रगति को नष्ट। और गँवा�
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अपने को जो मानते-करता दृढ़ किरदार
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अपने को जो मानते,लगते हैं दिलदार। ऐसा दिल अब है लगा,करता दृढ़ किरदार। ऐसे दृढ़ किरदा�
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माया जोड़ी रात दिन-सबल किया परिवार को
#विधा:- मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माया जोड़ी रात दिन,लिया बहुत ही दर्द। सबल किया परिवार को,बना रहा दृढ़ मर्द। हँसकर आगे को
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जलता दीपक आस का-हृदय चाहता खास
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जलता दीपक आस का,हृदय चाहता खास। लब से निकले प्रेम ही,मिटे सभी की प्यास। सफल भव्य किरदार स
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प्रेमश्वर की भक्ति में-जीवन करें निसार
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" प्रेमश्वर की भक्ति में,जीवन करें निसार। जीवन होगा तब सफल,सुखी रहे परिवार। चले वंश तब वृ�
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