कद्र ना की जिसने वक़्त की आज
क्या वक़्त भी कल उसकी कद्र कर पायेगा
ये तो विधि का विधान है, इसे कौन बदल सकता है?
कि जैसा बीज बोएगा तू, वैसा ही � read more >>
कृपाण सा किरदार था, मोम बन गया हु ,
ख़ून की बात किया करता था आज मैं थक गया हू ,
थका क्या शायद में डर गया हू ,
सो(निंद) लू चाहे जितना पर निंद म� read more >>
सारा जहाँ झूमे वहाँ,
मस्ती मिले रहूँ तहाँ,
रंगों से लोटपोट हो जाएँ,
पास आओ ऐसे हम खो जाएँ ,
देखें जमाना हमको कभी ,
खोए रहे देख छूटे हँसी ,
� read more >>