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गुरु: जीवन की आधारशीला 🌟 जब तक हाथ न लगे कुम्हार का, मिट्टी साँचे में नहीं ढलती है। नाविक बिन तो नाव भी नहीं सही दिशा पकड़ती है। जब तक read more >>
मैं तपती हुई रेत की प्यास हूँ...! पर जब आँखों से छलकूं तो , ऐहसास ख़ास हूँ.....! मैं गहरी नींद का सुकुन भी हूँ , और जागती आस भी.... टूटकर जो बिखर � read more >>
*कविता* *आधुनिक शिक्षा* आधुनिक शिक्षा के कारण बच्चों का बचपन खो गया । ढाई साल में प्ले नर्सरी एडमीशन का चलन हो गया।। बच्चों को किड read more >>
भगत सिंह आज अगर हमें देखते होंगे, हमें देखकर वह यही सोचते होंगे, क्या हो गई है मेरे देश की हालत ? क्यों फैली है हर ओर जेहालत? बट गया है मु read more >>
मैं भी सोचता था किसी की याद में ताजमहल बनाऊं, पर क्या करूं मुमताज मिलती ही नहीं। 1 दिन किस्मत खुली, मुमताज मिली, अब सोचता हूं ताजमहल बन read more >>
ना हिंदू खतरे में है , ना खतरे में है मुसलमान। खतरे में है आज सारा हिंदुस्तान। हिंदू मुस्लिम को मारे या मुस्लिम मारे हिंदू को, मरता है read more >>
भरी रही तेरी इफ्तार की थाली, पर जिसकी थाली रह गई थी खाली। उनकी भी फिक्र तुम कर लेना। अल्लाह की नेमत है तुझ पर भारी, कर ली है तूने पूरी ई read more >>
अपने लिए तो जीते हैं सब, पर दूसरों के लिए जीने का मजा कुछ और है। अपनी जुबान से तो हंसते हैं सारे, पर दूसरों की हंसी बन जाने का मजा कुछ और read more >>
!तुम वही हो! मेरे लिए तुम वही हो, मेरी प्रत्येक प्रभात का निःशब्द सुकून। मेरी संध्या की थमी हुई थकान का विश्राम, और मेरी रात्रि के एका� read more >>
નરસિંહની એ કરતાલ વાગી, ભક્તિનો વહ્યો પ્રવાહ, મીરાંના એ પદોમાં રેલાયો, કૃષ્ણપ્રેમનો ઉત્સાહ. અખાના છપ્પાએ તોડ્યા, આડંબરના થર, પ્રેમાન� read more >>
हाॅं मैने देखा है, जिन्दगी तेरे रंग हजार! जन्नत पाकर जननी के गोद में, जब मेने आंखें खोली। मन्नत हुई पुर्ण गुरुजनों की दीक्षा में, read more >>
कुर्सी आज की कुर्सियाॅं चारो पाॅंव जमाए घूम जाती हैं बिना पेंदी के लोटे सा, बैठने वाला भी बैठे बैठे दुनिया घूम लेता है, फिर, कौन चाह read more >>
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