कलम चाहे हज़ार हों, पर बात क्या होगी?
जो शब्द ही न पास हों, तो शुरुआत क्या होगी?
सजी हों अलमारियाँ, पर रूह ही न हो,
तो कागज़ों के साथ फिर, मुला read more >>
पत्थर की मूरत को छप्पन भोग लगाते हो,
सोने के गुंबद पर तुम चांदी चढ़ाते हो।
वो तो जगत का स्वामी है, उसे क्या कमी है?
असली जरूरत तो यहाँ, आँ� read more >>
शून्य होता जा रहा हूँ,
पता नहीं जिंदा हूँ या मरता जा रहा हूँ ,
सूरज की भाति रोज निकलता हू शाम को लौट आता हूँ ,
मौन होता जा रहा हूँ ,
शून्य ह� read more >>
दिनांक __30 /1 /2026
काव्य --- जब जब फूल खिले
बसंत ऋतु के आने पर इन रंग बिरंगे फूलों ने किया है क्या? खूब श्रंगार !
मत तोड़ो? इन फूलों को इनमें
छु read more >>
दैनिक काव्य सृजन
दिन- बुधवार
दिनांक 21 -1 _2026
शीर्षक ----यादें ही यादें
जब शाम ढले मेरे घर पर यादों
की दस्तक होती है
मन फिर बेचैन होकर न जा� read more >>
हम सब यात्री हैं एक ही राह के,
नाम अलग हैं, मंज़िल एक,
कोई तेज़ चलता, कोई रुकता है,
पर समय सबका साथी एक।
कोई सिखाता, कोई सीखता है,
कभी जीवन read more >>