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अंधेरे के साथी-छोटी सी आशा और घना अंधेरा
छोटी सी आशा और घना अंधेरा सिर्फ मेरे साथ एक जुगनू लंबी रात के बाद सवेरा कब तक जला के रखूं रूई की मसाला को फिर छाएगा लंबा अंधेरा चलूं �
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मस्ती के साथी-कुछ दिन बीते है ऐसे जैसे कोई बात नहीं
कुछ दिन बीते है ऐसे जैसे कोई बात नहीं लोग मस्त है मस्ती में ,पूरी दुनिया की बात यही कुछ बातों का तर्क नहीं सौ बातो की बात यही
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तेरी कमीं खलती है- आज भी तेरी कमी तू आज भी है मेरे लिए बेटी नन्हीं
तेरी कमी खलती है आज भी तेरी कमी, तू आज भी है मेरे लिए बेटी नन्हीं। कैसे मैं समझूं? मानूं मैं बातें पराई पराई कहते हर कोई यही सोंच क�
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तेरा मेरा साथ-किनारों सा सड़कों के चलता रहा
तेरा मेरा साथ तेरा मेरा साथ किनारों सा सड़कों के, चलता रहा सुदूर कभी ना मिल पाए हम, दाएं बाएं मुड़ मुड़ कर चल कर भी सीधे कभी नहीं ना एक
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पानी अदभुत तत्व है-करिए हद में खर्च
(कुंडलिया छंद) पानी अदभुत तत्व है,करिए हद में खर्च। तभी धरा गुलजार हो,नित्य करें नव सर्च।। नित्य करें नव सर्च,बनें ज्ञानी का साथी। फैल
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वो याद है ना जब बचपन में हम नाराज होते थे मां से
वो याद है ना जब बचपन में हम नाराज होते थे मां से, तब उस नाराजगी और मां के मानने का एक अलग ही बात होती थी, रूठते हम थे तो चप्पल मां की निकल �
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नेकी करते हम चलें-होगा बड़ा प्रताप
(दोहा छंद) नेकी करते हम चलें, होगा बड़ा प्रताप। भागे बाधा दूर तब, खुशियों में हों आप।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीप
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माया में सब लीन है-भूल गए हैं मूल्य
(कुंडलिया छंद) माया में सब लीन है,भूल गए हैं मूल्य। सब रह जायेगा यहीं,जाओगे बन शून्य।। जाओगे बन शून्य,जन्म ले फिर से आना। फिर माया में फ
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माया से संसार है-सबका अपना दाम
(कुंडलिया छंद) माया से संसार है,सबका अपना दाम। खुद को तुम अति योग्य कर,करिए सुंदर काम।। करिए सुन्दर काम,समाँ रौशन तब रहता। छोड़ें कभी �
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गर्मी का मौसम अभी-तापमान है गर्म
(दोहा छंद) गर्मी का मौसम अभी, तापमान है गर्म। बदन पसीना मय रहे,चाहत रहती नर्म।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देव�
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वो बचपन जाने कहां गुम हो गया है-जाने वो शैतान कहां खो गया है
मासूमियत भरे चेहरे के पीछे एक शैतान हुआ करता था, और वो शैतान भी कितना नादान हुआ करता था, अपनी छोटी छोटी शरारतो से सबको परेशान किया करत�
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गुलशन मय हो तब धरा-खिले सभी की साध
(दोहा छंद) गुलशन मय हो तब धरा,खिले सभी की साध। मिले सभी को न्याय तो, होगा कम अपराध।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(
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