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कविताएँ
बादल गरज रहा है-मानसून बरस रही है
बादल गरज रहा है, मानसून बरस रही है। प्यासी घटा तरस रही है, ये दिल और हसने लगा है। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(दे�
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जीवन की बगिया- फूलों से भरी रहे
छोटी पंक्तियां प्रथम फूल पर मुसकाकर मैंने बात बना ली थी। मैंने मिट्टी पानी से पौधे नयी उगा ली थी। जीवन की बगिया फूलों से भरी रहे �
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प्रेम का बीज जैसे दबाया उधर-दुख का समीकरण समझ आ गया
प्रेम का बीज जैसे दबाया उधर उनको दुख का समीकरण समझ आ गया। नेह बन्धन बने, साथ चन्दन बने मेरे सपने पर दुनिया का मन आ गया। बात हम भी किये, ब�
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आओ मन की घाटी में चलें
आज आओ, मन की घाटी में चलें। जो जहां रुक आए उससे फिर मिलें। साथ का साथी नहीं विश्वास से जो जागता जो उड़ानों की पहुंच से पार मुझको थामता�
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अकेलापन- अकेलेपन की वजह से हुई जीवन में मेरी हार
जब नहीं दिया किसी ने साथ, जब उम्मीद उमंग थी पास, अकेलेपन की वजह से हुई जीवन में मेरी हार। कोई किसी पर ना करें इतना बड़ा अत्याचार, किसी क�
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जलाओ न मेरे लिए तुम दीवाली-मेरे दुख के बादल छटेंगे
जलाओ न मेरे लिए तुम दिवाली, तुम्हारे लिए मैं जला न सकूँगा। बिछड़ जायेंगे हम अकेले - अकेले, न तुम साथ दोगे न मैं साथ दूँगा।। हृदय में मर�
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जलाओ न मेरे लिए तुम दीवाली-मेरे दुख के बादल छटेंगे
जलाओ न मेरे लिए तुम दिवाली, तुम्हारे लिए मैं जला न सकूँगा। बिछड़ जायेंगे हम अकेले - अकेले, न तुम साथ दोगे न मैं साथ दूँगा।। हृदय में मर�
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आजाद देश की नारी हो तुम- करना नहीं किसी की गुलामी
आजाद देश की नारी हो तुम करना नहीं किसी की गुलामी सहना नहीं जुर्म तुम मत भरना तुम किसी के हां मात्र में हामी तु धीर वीर गम्भीर है तेरी �
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स्वच्छता स्वस्थ रहने की एक चाभी है
स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत अपने देश की रक्षा हम स्वयं कर जायेंगे, चारो ओर प्रकृति को सुंदर हम बनायेंगे। करेंगे न कभी कूड़ा हम इधर उधर, ध�
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बारिश की बुंदे-पृथ्वी को सजा रहीं हैं
बारिश की बूँदे तपक रहीं हैं, पृथ्वी को सजा रहीं हैं। धरा पर सुहानी छाया छा रहीं हैं, फूलों को खुशबू दे रहीं हैं। बादल गर्ज रहे हैं ऊँच�
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सावन की फुहार-हर्षोल्लास भरती है
सावन की फुहार खुशबूवण लाती है, गर्मी की छुट्टी, हर्षोल्लास भरती है। बादलों की छांव में बचपन का खेल, खुशी-गम के संग जीने की मिसाल देती ह�
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प्रभु के जन को आशीष मिले
अतिशय कोविद् श्रेष्ठ प्रवर। चरणों में अर्पण इंदीवर।। करती मैं वंदन सतत् सतत्।। यशशील रहे एकल अविरत।। हो भाव विभाव प्रभाव सदा। क�
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