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संघर्ष जीवन में निरंतर है, इसका और न कोई प्रत्युत्तर है, जिसने चखा है स्वाद संघर्ष का, उसके जीवन में औरों से अंतर है. जिसने किया है संघ� read more >>
इंसान को मिला ईश्वर का अभय वरदान , संघर्ष। हार को न स्वीकार करे मूलमंत्र है, संघर्ष।। जीत है जिसका जज्बात, सोच है संघर्ष। भाग्य को अ� read more >>
#आदिपुरुष कविता = ( आदिपुरुष ) ज़हर ये कैसा तूने उगला ! मनोज मुंतशिर उर्फ़ मनोज शुक्ला !! यह छद्म युद्ध आदिपुरुष ! यह सनातन विरुद्ध आदिपु read more >>
दिल,पे दोस्तों, अब ,लिखा दे क्या ? हम भी कोई , एक नाम...... ! के ,ज़िन्दगी की, ढ़लती हुई । हसीन शाम मे दस्तूर की वो शमाँ जलाए पायल की छन-छन से read more >>
तीखी अदाएं तेरी कमसिन उमर है, यौवन निशिला लम्बी लट पतली कमर है। बलखा के क्यों न तुम ठूमका लगाए, आशिकों के दिल को क्यों न धड़काए। (स्वरच read more >>
तेरी जवानी अंगूरी पानी है, तुझ में है मौजों की रवानी। तुम ही मेरे सपनों की रानी, दोनों मिल के लिखेंगे प्रेम कहानी। (स्वरचित मौलिक) संद� read more >>
जा रहा हूं मैं जान अपनी छोड़कर यहां, लाऊंगा तेरे वास्ते सारा जहां। एक तमन्ना जीवन की, तेरे प्यार पर सिर्फ मेरा अधिकार है। (स्वरचित मौल read more >>
बहुत अच्छी लगती है बलम जी की बोली, बड़ा मजा आता है बलम जी का दर्द लेने में। मैं चांदनी हूं उनके जीवन की, वो मेरी जिन्दगी का चांद। (स्वरच� read more >>
तीखी अदाएं तेरी कमसिन उमर है, यौवन निशिला लम्बी लट पतली कमर है। बलखा के क्यों न तुम ठूमका लगाए, आशिकों के दिल को क्यों न धड़काए। (स्वरच read more >>
रूप दिया भगवान ने जिसे, उस पे कोई क्यों न इतराए। खुशबू अदाओं की, क्यों न लुटाए। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देव read more >>
है बड़ा निशिला बारिशों का पानी, मेरी रानी आ जरा संग भींग लें। घूंघट से मुखड़े को निकाल जरा, आने गालों पे बरसात की लाली। (स्वरचित मौलिक) read more >>
आज हवा का झोंका मदहोश है, आ गले लग जा ऐ मेरी जिन्दगी। आज न करना कोई बहाना , बरसात की बौछार बन मुझ पे बरस जा। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार स� read more >>
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