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कविताएँ
मेरा प्रश्न-बना हृदय में प्रश्न आज मेरा भविष्य कैसा होगा
हूँ व्यथित आज मैं सोच के यह, कि कल क्या, कैसा, क्यूँ, होगा? क्या जो है आज, वही कल होगा? या फिर भाग्य ही मुह मोड़ेगा? मेरे उर की उथल पुथल
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हम तो ठहरे मध्यम वर्गीन -ऊँचा स्वप्न सजाते हैं
हम तो ठहरे मध्यम वर्गी न ऊँचा स्वप्न सजाते हैं। एल० ई० डी० का ख़्वाब छोड़ सौ वटिया को ही जलाते हैं।। न फ्लोर कवर न ए० सी० कूलर न सीलिं�
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चलों सवेरा हो गया -अब जागों हाथों मे है किस्मत तुम्हारे
तरह- तरह, से करतब करते । वो आसमान के पक्षी , बोलो, अब कहाँ है।? देखों ! उन्हें आसमान ढूँढ रहा है। सुबह की वो चहचहाहट, यो चिड़ियों का चहक�
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ख़ुद की तलाश में निकला हूं-खो गया था इस संसार में
ख़ुद की- तलाश में निकला हूं, खो गया था इस संसार में,, मिलने- के बाद बताऊंगा, ख़ुद में मैं हूं या ख़ुदा है....!! -मोती
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जिनके दिल की शान हो तुम-फेर नहीं पाओगे उन्हें
दिल को- बदलते नहीं देखा यारों,, गुज़रते रहेंगे कितने ही- हमसफ़र जीवन के इस, सफ़र में दिन रात की तरह,, जिनके दिल की शान- हो तुम फेर नहीं �
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मन चंचल तेज सा-नहीं गहरा जल राशि कोई सागर
मन-चंचल- तेज सा नहीं गहरा, जल-राशि कोई सागर,, में डूब जाओ- अद्भुत मोती ना मिले तो कहना..!! -मोती
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वृद्ध गुलाब-क्यूँ इतने खामोश हो तुम साँस है बेहोश हो तुम
क्यूँ इतने खामोश हो तुम? साँस है बेहोश हो तुम। जी रहे हो जानकर कि और कुछ न हो सकेगा। खिल उठा हूँ अब तो केवल मधुरसों का भोग होगा।। काटत�
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चमकती हैं परियां स्वर्णिम सितारों की तरह
उड़ चलीं परियां अपनी हवाओं में, मधुर स्वरों में लहराती बादलों के साथ। सोने के ज़र्रों से भरीं रौशनी के दिये, मनोहारी सबसे आकर्षक छाया
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चमकी जब भी दामनी-उत्सुकता हो खास
(दोहा छंद) मुझे मिली है कामनी,हुआ परिवार स्वर्ग। दौलत अब नित ही बढ़े,लिखता हूं अरु सर्ग।। चमकी जब भी दामनी,उत्सुकता हो खास। नजर गगन को
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भिक्षा देना पुण्य है-होगा बड़ा प्रताप
(दोहा छंद) भिक्षा देना पुण्य है,होगा बड़ा प्रताप। मिले दुआ भी आप को,रहे नहीं संताप।। शिक्षा का जब साथ हो,जीवन यह वरदान। दिक्कत सब गायब
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नारी-उसके आगे कदम बढ़ाने में पंखों को काटा
नारी के पंखों को काटा सदा ही इस जमाने ने, लाख प्रश्न उठा दिए उसके आगे कदम बढ़ाने में, आवाज दबा दी जाती थी जब भी नारी ने मुंह खोला था, अप�
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ऋषि मुनियों की यह धरा-भारत देश महान
(दोहा छंद) ऋषि मुनियों की यह धरा,भारत देश महान। सदा शांति उपदेश दे,जाने सकल जहान।। रहे खुशी परिवार में,अनुपम है यह धाम। सभ्य बनाए ये ह�
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