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भारत देश महान है-अति सुन्दर इतिहास है
(दोहा छंद) भारत देश महान है, दया शांति पैगाम। अति सुन्दर इतिहास है,प्रगति प्रेम है काम।। सदा कर्म पर ध्यान हो,अदभुत बने सुजान। दुनिया
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मुझको तुमसे प्यार है-तुम हो दिव्य सवाल
(दोहा छंद) मुझको तुमसे प्यार है,तुम हो दिव्य सवाल। तुम ही मेरी हो जहां,करती दूर बवाल।। चिन्तन तेरी मैं करूं,तेरा बनूं जवाब। तेरी हर उम
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लहरों की स्वर-मन में एक अद्भुत ख्वाब जगाती हैं
लहरों की स्वर सुनो, धीरे से आओ, खुशबू सी लेकर, सपनों को सजाओ। समुंदर के तट पर ये ध्वनि बहती है, अजनबी सी है और बेहद खूबसूरती है। चलो, लहर�
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कहां निकालू-इस अटल विश्वास को
कहां निकालू इस अटल विश्वास को टूटते फूटते जो रच रहा इतिहास को। संभव है द्वंद मिट जाए न हो अवसाद इसका भेद से निकला हुआ तीर चुभ जाए हव�
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तेरी यादें-तेरी यादें दिल को छू जाती हैं
तेरी यादें दिल को छू जाती हैं, मन को भावों की लहर लहराती हैं। जब भी याद आती है वो लम्हा, आँखों में चमक सी जगाती हैं। तेरी हंसी, तेरा मुस�
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कितनी नज़दीक-फ़र्क इतना -सा है फिर भी तुम कितनी नज़दीक हो
कितनी नजदीक तुम दूर हो कई मील मुझसे फ़र्क इतना -सा है, तुम्हें देखें नहीं है फिर भी तुम कितनी नज़दीक हो शाम के घुंघराले चोटियों में, उ�
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रिमझिम बारिश -जीवन को नई उमंग
रिमझिम बारिश की बूंदें गिरी, पृथ्वी को अपने आगोश में भरी। मन को बहुत ही खुशी होती है, जब बारिश की धुन प्यार से बोलती है। पत्तों पर बूं�
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सोचा-मैं महलों की रानी होती
एक दिन मैंने सोचा मैं महलों की रानी होती जो मन करता वो मैं खाती मेरे आगे पिछे दासी होते मम्मी पापा मेरे साथ होते मैं घुमती बागों में ख
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सूरज- लाल आग का गोला है
सूरज दादा सूरज दादा लाल आग का गोला है । गरमी में तपता है दिनभर शाम ढले सो जाता है ।
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परिवार तो तब ही बनता है ना -जब मां लोरी सुनाती है
परिवार तो तब ही बनता है ना ? जब मां लोरी सुनाती है थपकियां दे के सुलाती है हांथ पिता का हम पकड़ कर निश्चिंतता से सो जाते है ।
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मन की व्यथा होती है कविता
मन की व्यथा होती है कविता दिए की बाती सी होती है कविता! दिल के अरमान को जगा देती है कविता ! कुछ कहने को शब्द खोजती है कविता ! कुछ दर्द को
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जीवन रूपी यात्रा में कहां विश्राम लगेगा
जीवन रूपी यात्रा में कहां विश्राम लगेगा !यह तो मुझे पता नहीं है! चंद लफ्जों में मेरी बात कहां सिमट ने वाली है! अपने शब्दों में इस जीवन का
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