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कविताएँ
मां की दुआ के सहारे कट ही जायेगा
माँ की दुआ... बहारों के मौसम में भी दिल में पतझड़ है, किसी ने हमें दुआएं दी तो कहीं सिर्फ तोहमतें मिली, झोली मेरी खाली थी, जिसने जो प्�
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आज पंक्तिया मेरी जो ये तुम पढ़ते हो
सभी का तहेदिल से आभार... कौन समझाए बेसबब संसार को मैं बखूबी निभाता हूं किरदार को जीतने की नहीं होड़ में शामिल मैं हंस के स्वीकारता ह
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मिलन देखिए तकदीर का -अनजाने मे ही सही
मिलन देखिए ,तकदीर का अनजाने मे ही सही, निगाहों ,से ही हाल पुंछ के, कह दीजिए अब और नहीं । जो ताबीज हिफाजत करता था । मेरी कभी ,तोड़ दीजिए
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मन मंदिर महका दो-मेरा बचपन लौटा दो
मन मंदिर महका दो, मेरा बचपन लौटा दो! शामे जिंदगी की वो यादें, मैने देखा आप भी जानो! दमक रहा ऐसे मानो , सोने सा बचपना फिक्र ! फिक्र नही क�
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सिर्फ याद है मुझे उसका ठिकाना
दिल में इस तरह से बसा है! ये दिल-ए-हाल है मेरा- भूल गया मैं अपना ठिकाना, सिर्फ याद है मुझे उसका ठिकाना दिल में इस तरह से बसा है!! -मोती
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बंद हैं ये पलकें जानूं से गुफ्तगू हो रही
मेरे कर्मों- नसीब का हाल-ए-मंजर है बंद हैं ये पलकें! जानूं से गुफ्तगू- हो रही है दिल जाग रहा है!! -मोती
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सुन-ए-भाई हम सब की यह कहानी
यह हाथ उसकी- इबादत को उठते हैं यह आंख- दर्शन को बेताब हैं ये जुबान उसके- गुणगान करते नहीं थकते यह दिल- उसी के नाम धड़कते हैं हम ईश्व�
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अजीब सी मंज़र मेरे क़रीब है
अजीब सी मंज़र मेरे क़रीब है! मिट्टी- चल रही है मिट्टी- बोल रही है मिट्टी- के रिश्ते-नाते हैं मिट्टी से- एक गड़बड़ी हो गई जिसने यह- चमत
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देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने
देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने, अपनी आंखों पर न किया था एतबार मैंने, क्या होता है कोई इतना भी खूबसूरत, यही पूछा था खुदा से बार-बार मैंने।
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शब्द-कभी-कभी शब्दों में
कभी-कभी शब्दों में, संसार नजर आता है। कभी-कभी शब्दों से, भार बढ़ा जाता है। यह कभी छोटे, कभी व्यापक बन जाते हैं। कहना चाहो जो कुछ, शब्द क�
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भारत का परचम छा रहा
सर पे थी पगड़ी केसरी हाथों में खंजर तेज सा दिल में सजा कर वीर रस चलने लगा दल वीर का अंग्रेज की औलाद सुन तेरा समय अब जा रहा हर दिल में ह�
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मेरे अंतर का सुख
मेरे अंतर का सुख मेरा दुख कैसे! जीवन के अनमोल बिंदु से, मैं विचलित कैसे! संशय और समाधान में, बिखरा जीवन पल पल, समय अगर रुक जाए तो, ना सोच�
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