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इतिहास में अमर है उसकी कहानी लड़ी जो जंग आजादी की कहती भारत में स्वयं अपनी जुबानी लड़ी थी झांसी की रानी लक्ष्मी मर्दानी से वार पतवार read more >>
एक शाम, खाली सी एक शाम, जब अंधेरा छाया, मन में छाए उदासी का रंग। रात के संग, सन्नाटे में ढूंढे, कुछ सहारा, कुछ रोशनी, कुछ अपने सपनों के रंग read more >>
किया जो विश्वास तूने अपनों पर बस धोखा ही तो खाया है , फिर क्यों तू इतना इतराया है, इसने घर-घर को जलाया , रिश्तो ने दे कर दुहाई हर अपने को लू read more >>
अभिमानी का मान कभी नहीं मिल पाएगा जो भी था तू उसकी खबर नहीं जो है वह भी शून्य बन जाएगा। read more >>
ईष्र्या एक आग जलाकर कर देगी तुमको खाक , पाओगे ना कुछ तुम इसके पास हर पल देगी तुमको यह एहसास जल जाओ तुम इसके साथ। read more >>
कोई तो है-(मां पर कविता) मन में जीवन में जीवन भर सदा के लिए दिल में बसी, कोई तो है। हर एक दुख में दर्द में सामने खड़ी हो जाती है read more >>
कली को स्वतः स्वच्छंद, ज़रा खिलने दो। खुद को खुद से, ज़रा मिलने दो। जो जैसा है, वैसा, ज़रा बनने दो। मन को मन की, ज़रा सुनने दो। तोड़ो, मर� read more >>
बनावटी जिन्दगी कितनी बनावटी जिन्दगी जीने लगे है हम ? झूठा रोने लगे है हम झूठा हँसने लगे है हम | एक चेहरे पर कई चेहरे लगा कर जीने लगे है ह read more >>
मेरा मैं मुझमें सिमटकर रह गया है, जीवन के भीतर छुपकर रह गया है। बहुत सारे सपने थे मेरे पास, पर राही उनमें ही उलझकर रह गया है। हर चीज की read more >>
आँचल के आँच से पिघल जायेगा तेरा कोमल नाजुक बदन अंगड़ाई लेती बे खौफ बेखबर नयेन किसी दिन भाग जाएगी ले के चैयन निगोड़ी जुल्फ तेरी बदनाम read more >>
आज संकुचन को मिटाकर चलो पथ गामी बने। है धरा निस्तेज अलौकिक रूप के स्वामी बने। हदय पर यह बोझ कितना, था ही उसका साथ कितना, मन की इस विचलि� read more >>
कविता = ( कलयुग ) कथनी करनी में फ़र्क़ हुआ ! यह कलयुग का प्रभाव !! कर्म हुए दानव जैसे ! बातों से भगवान !! भगवा भी बदनाम हुआ ! भगवे में शैतान read more >>
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