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हर वो शख्स मेरी नजरों में बड़ा है हर वो शख्स मेरी नज़रों में बड़ा है जो जान हथेली पर रखकर सीमा पर खड़ा है और जब जब आयी है सरहद पर बाधा बन न� read more >>
मोह - माया जात - पात उच - नीच अमीर - गरीब भावनेचे होळीमध्ये दहन होऊ दे या जगात फक्त प्रेमच प्रेम राहू दे..... धन्यवाद दोस्तों लेखक मुस्त� read more >>
जड़ें कट चुकीं हैं हमारी संस्कृति की हमारी सभ्यता की तीव्र गति से बदलते संसार में मानवता की सूख चुकीं हैं शाखाएं सगे सम्बंधी और मित� read more >>
तुम आना इक दिन मेरी सूनी दुनिया में मेरी खाली बाहों में मेरे बालों को सहलाना मेरे सीने से लग जाना फिर आके तुम न जाना मैं वक्त से बदला � read more >>
नाम नहीं है। यहाँ कोई मुकाम से पहले , चाहत कि हर जगं मे , दिवानो कि हर फरमाईस पे मेरे दिल को लोगों ने बहुत आजमाया है। जख्म तो देख मेरे � read more >>
हस्ती तो बहुत देखी माँ तुझसे ज्यादा सुकून कहीं और कहाँ, माँ भले ही सो लुंगी मखमल के सेज पर तेरे गोद से ज्यादा आराम कहीं और कहाँ l माँ ये � read more >>
ये शाम... उदास है,तन्हा है। जानती हो क्यों? क्योंकि, तुम नहीं हो। ये शाम.... अजीब है, उत्साहहीन है। रंगहीन और अनुपयोगी है। जानती हो क्यों? read more >>
नारी वह फूल है जो सबको खुशबू देती है, नारी वह प्रकाश है जो सबको रोशनी देती है l नारी एक ऐसी पेड़ है जो सबको छाया देती है, नारी ऐसी फूल है ज read more >>
मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) अभी तो सिर्फ पैरों पर खड़ा हुआ हूँ अभी तो चलना बाकी है। लड़खड़ाते पैरों का संभालना तो अभी बाकी है। कभी गिर read more >>
ग़लती करने के लिए हमें तैयार किया जाता है बचपन से हमारे अपनों के द्वारा जब हम छोटी छोटी ग़लती करते हैं तो हमें हमारे मां बाप वृद्ध कर read more >>
मैं भारत हूं स्वतन्त्र भारत परन्तु मेरी स्वतन्त्रता की एक पराधि एक सीमा तय कर दी गई है अतिथि देवो भवः सदियों से मेरी परम्परा रही है � read more >>
भाई की ढाल हाथों में स्वागत थाल लिए खड़ी थी कब आए मेरा भाई आंखे पसारे द्वार पर अड़ी थी घंटे बीते ,बीते पहर फिर हुआ वक्त हुआ शाम का भुंकी read more >>
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