कविता- मुहब्बत है गांव में!
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी-25/01/2023
माना कि थोडी सी गुरबत है गांव में।
शर्म है, रोटी है, मुहब्बत है गांव में।
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ख़ुदकी चाहत मे, खुदके भी ना रहे
इतनी हद से चाहत की -की,मरहम भी न मिल सके
शिकायत क्या करे किसी से, उस लायक भी न रहे
घुटन भरी परी है जिन्दगी, read more >>
कविता- तुम्हारे लिये।
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी- 21/01/2023
निवेदन- प्रस्तुत पंक्तियां नायक के ह्रदय की पीड़ा है एक कृतघ्न नायिका के लिये। read more >>
क्यों? न! प्रिय मैं तुम्हें पहचान पाई !
क्यों ?मैं दौड़ती रही उस कठिन समय में तुम संग अकेले !
क्यों ?न राह के कांटे को मैं समझ पाई ?
जो मैंने read more >>