"मुझे बनारस से नहीं,
वो पान वाली गलियों से जानो,
मुझे सुबह के सूर्य अर्ध्य के साथ उगती किरणों से जानो,
मुझे बनारस से नहीं,
मुझे दशाश्व read more >>
"साइकिल का था वो जमाना,
जिसके पीछे बँधा रस्सी पुराना,
वक्त वक्त पर काम आए,
सामान गिरने से बचाए,
चलती बस मेहनतीयो से,
शरीर स्वस्थ निरोग read more >>
⭐ कविता = ( प्यार ढूंढ़ता है )
जिस्में मंडी में प्यार ढूंढ़ता है !
मुर्दों के सीने में जान ढूंढ़ता है !!
रोज़ लगती जहाँ प्यार की बोलियाँ !
उस � read more >>
Dear ससुराल तुम मायके सा फिल करा पाओगे क्या,
बहु बनने का शौक नही मुझे अपनी बेटी बना पाओगे क्या,
Dear सासु मां में आपसे वादा करती हूं में आपको � read more >>
कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर.
लाकर मुझे खड़ा कर देती है!
जहां से मैं मुड़ ,कर पीछे देखना भी नहीं चाहती हूं
मगर वह गुजरा हुआ पल, वह अतीत ,हम� read more >>
आजकल हम बहुत शांत हो गए हैं
पर ऊपर से तो यह शांति सर्वविदित है
पर न जाने क्या मन में बहुत ही हलचल मची हुई है
जिसकी शोर से मैं अपने आप को � read more >>
बार-बार पता नहीं क्यों?
कुछ मैं लिखती हूं. फिर मिटाती हूं .न जाने क्या ?
मन की रहस्य को उजागर करना चाहती हूं "चाहती तो हूं कि लिख दूं 'अपन read more >>