पुरुष कठोर क्यों
पुरुष इतना कठोर भी नही होता ,
वो सिर्फ बाहर से दिखता है ,
दिल का बहुत कोमल वो होता है ,
कठोर होना उसकी मजबूरी है ,
वो परि� read more >>
न कोई गम न किसी गम की खबर!
और कहते हैं दिल के सच्चे होते हैं!
सच में दिन तो बचपन के अच्छे होते हैं!
खेल में यू मगन कि पूरा दिन एक पहर लगता � read more >>
भींच दूंगा मैं उसे जो द्वंद में शत्रु है l
स्थिति भले हो मरण की ,
भले हो कटना खंड खंड भी l
मरणासन्न में ही सही ll
होगा विजय का जयघोष भी,
भले � read more >>
प्रेम की स्वप्निल डगर पर
दो तरफ हम एक पथ पर
पुलक चलते, समानांतर
पर कभी जुड़ने की कोई आस न हो
प्रेम हो, पर मिलन की कोई प्यास न हो!
एक सखी � read more >>
कविता . -हंसी खो गई है।
रचना -जितेन्द्र शर्मा।
तिथी -14/01/2023
सब कुछ तो है, बस हंसी खो गई है।
पेड़ से उतर हमने अट्टालिका भवन बनाये हैं।
सोन read more >>