Dear 2022 thank you,thank you
उन lessons के लिए जो तुमने मुझे सिखाया, एक नहीं हजारों
इसी साल से सीखा की लोग बदलने के लिए,decemaber का intzar नहीं करते
बल्कि mood and need के हिस� read more >>
बीक रहा है पानी,पवन बीक ना जाए
बिक गई है धरती, गगन बीक ना जाए
चांद पर बिकने लगे हैं, ज़मी
डर है कहीं सूरज की तपन बीक ना जाए
हर जगह बिकने ल read more >>
एक कहानी है मेरी जो अधूरी रह गई
करने बैठा था पूरा स्याही ही कम पड़ गई
जेल पेन समझ के मैं लिखता गया वो चलती गई
में लिखता गया वो चलती गई, कम read more >>
जो इंसान संघर्ष के बालू में दौड़ लगाता है उसी इंसान के पास अनुभव का खजाना होता है इसलिए कभी भी अनुभव की कमी महसूस हो तो उस इंसान के पास ज� read more >>
रचना- "नारी तू अविचल है।"
रचनाकार- जितेन्द्र शर्मा
विधा- कविता
तिथी-29/12/2022
नारी!
नारी तू अविचल है।
पंकज सी कोमल है पर द्रढ है तू गिरि read more >>