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कविताएँ
वर्षा सुंदरी
कविता -वर्षा सुंदरी खुशियों से मन, झूम उठा मेरा देख उमड़ते,बादल का घेरा भीगूंगी मैं,वर्षा फुहार में डूबूंगी तब, प्रेम से प्�
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प्रकृति ही परिवर्तन है
कविता -प्रकृति ही परिवर्तन है प्रकृति ही परिवर्तन है परिवर्तन धरती अम्बर है सुख से पहले दुःख का आना राई का पर्वत बन जाना नन्ही कलिय
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सपनें
कविता -सपने सपने बुन लो गुन लो धुन लो खुद ही चुन लो सपने बुन लो। सारे सपने होते अपने सोंच समझ कर दिल की सुन लो। गुन लो धुन लो सपने ब�
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बोलने से पूर्व प्यारे,बोल का तू तोल कर ले
कविता - बोलने से पूर्व प्यारे, बोल का तू तोल कर ले। देख लो कोयल की कूक टेरती है बोल न्यारी काग सी काली भले है ,है मनोहर बोल प्य�
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राम संग कर प्रीत तूं सदा रहें उदगार
सबके दाता राम हैं, हृदय बसा लें राम। सब प्रभु ही सम्हाल दें, करें सरल हर काम। सबके दाता राम हैं,रहें खुशी में यार। गम को हम तूं मार दें,ह
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मुलाकात परी से
एक रात की बात है, सोया मैं था, अचानक सामने कुछ आभास हुआ। चौंक कर मैं उठ बैठा, सामने देखा, एक खूबसूरत बला की सुन्दरी खड़ी है। मैं हर्षित
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कल्पना की दुनिया
कल्पना की दुनिया को साकार करना है, अपने सपने को हर हाल में सच करना है। देखूं स्वपन रजनी की आगोश में, प्रातः उठते ठगा सा रह जाता हूं। प�
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शोभाश्री
दिन है सर्दी का कोहरा छाया है। सरसों के सुमन पर रजत बिखरी पड़ी। भानु निकल रहा कि कोकिला चल पड़े भृग भाग रहे सरसों के सुमन पर क्या पत
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मधुमास का मौसम
था मधुमास का मौसम पढ़ा था उल्टा अम्बर न जाने थी थाल भरी मोतियों से आंगन में फैले दूध के झाग आकाश था या आंगन विभावरी थी चांदनी उजास था �
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गोरी की रक्षा
किसानों का यह असली साथी हर फुर्सत है ये इसके उपयोगी पीते हैं हम गौरी का गोरस बाड़ी साड़ी अपनी बनाते मक्खन छाछ दही जैसे और कई मिठाइयां
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पता नही वो खुद में कौन सा राज लिए बैठे है ।🤔🙄
पता नही वो खुद में कौन सा राज लिए बैठे है । हमारे हर जख्मो का इलाज लिए रहते है। खुद से जुदा भी वहि करते है ।,और फिर मना लेते है हम जानते ह�
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साथ नही देता जब जग........।
साथ नही देता जब जग, तब आँख में आँसू आते है। रह जाते है ख़्वाब अधूरे, और कुछ न कह पता है। अंदर ही अंदर घुटता है, और खामोश हो जाता है। ट
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