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कविताएँ
शब्द और ईमान
दायरों और मायनों को साथ रखते हैं शब्द और ईमान दोनों साथ बिकते हैं कभी ईमान शब्दों को बेच देता है कभी शब्द ईमान को बेच देते हैं लेकिन ह�
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🥀 व्यावाहारात्मक ज्ञान 🌹
ना चाहत्तें साद करी कि, जा नील गगन का त्तारा ला! उम्मिदों कि भरी रौशनी, बढ़ - बढ़ के सफ़ल किनारा ला!! जगमग - जगमग चन्दा आकाश में,
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Break up
कभी सोचा नहीं था कि एक दिन ये से बिखरुंगा! कि कोई संभलने के लिए नहीं होगा
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मैं प्रेम गीत कैसे गाऊं?
मैं प्रेम गीत कैसे गांऊ? जब प्रेम दिवानी बाला को, दैत्य कोई फंसाता है, किसी पिता की श्रद्धा को, टुकडों में बांटा जाता है, तब मैं कैसे मु
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किसान पर कविता
किसान -पर कविता बीज नहीं उम्मीदें बोता आशाओं का दीप सजोता मंद हवा भी उन दीपों को फिर भी क्यों जलने ना देता! झेल दुर्दशा
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लोग कुछ नहीं कहेंगे।
लोग कुछ नहीं कहेंगे, कुछ नहीं मिलेगा यहां वहां डरने से , मंज़िल नहीं मिलेगा यू हारने से , डरते आरएच जाओगे सहमे रह जाओगे पर ऐसे जीवन में �
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नीड।
लगाकर तिनके की भारी भीड़, बनाने लगी हु मै एक नीड। अब इसी में मेरी शाम और है सवेरा। क्योंकि बारिश से बचने का है,ये मेरा एकमात्र बसेरा। ऊं
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ख्वाहिशें।
बड़ी अजीब सी हे, मेरी ख्वाहिशें नजाने क्यों राह से भटक जाती हूं, फिर याद आता है, अचानक तो अल्फाजों को समेट कर वापस ले आती हूं। फिर भी नज�
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फिर लोकर ये समय नही आएगा।🌈🌈🌈
उड़ने दो मुझे खुले आसमान में, फिर लौटकर ये समय नही आएगा।अब मां बाप के साए में उछलती हुं, पर ये लम्हा जीवन में कभी नहीं आएगा। मेरी वो हसीं,
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प्रस्फुटित है हर क्षण
यहां पर हूं मैं जीवित, सिर्फ एक है मतलब। वह प्रकृति रूपी शक्ति, प्रस्फुटित है हर क्षण।। मोती-
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तू है धरा पंचभूत अविरल
तू है धरा पंचभूत अविरल, तू ही है ब्रह्मांड श्रेष्ठ अंश।। जीव पलते तुम्हारे आंचल, करते-भोगते कर्म व अकर्म।। सबका तू ही है कर्ता-न्याय
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मैं खत को पढ़कर
गजल -मैं खत को पढ़कर मैं यह खत, तेरे नाम लिख रहा हूं चुन चुनकर शब्दों में, पैगाम लिख रहा हूं लिख कर क्या करूंगा, मैं अपने पता को इसीलिए �
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