कविता = ( मैं नहीं मानता )
झूठी तारीफ़ों के पुल !
मैं नहीं बाँधता !
पत्थरों को ख़ुदा !
मैं नहीं मानता !
कर्म का लेखा लिखना मुझे !
हाथों पर भ� read more >>
आया सावन झूम के, निर्मल हो बरसात।
कोयल गाती गीत है, मधुर मिलन की रात।।
आया सावन झूम के, बादल गरजे घोर।
पवन मस्त है रूप में, नई लगी है भोर� read more >>