सच्ची है, नहीं तकिया- कलाम।
गुलामी, तुझे सलाम।
कोई धर्म का, कोई कर्म का, कोई शर्म का गुलाम है।
कोई आदत का, कोई मत का, कोई हरम का गुलाम है।
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सफलता तो कभी कभी मेहनत न करने वालो को भी मिल जाता है,
यही तो भारत का दुर्भाग्य कहलाता है।
60% लाने वाले सरकारी दफ्तर में बैठे है,
90%लाने वा� read more >>
अन्त हुआ एक युग का
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अन्त हुआ एक युग का,
जैसे ही अनात्म हुई सुश्री लता।
रहे गयी बस यादों में हम सबके ।
गीतों में अमर हुई स्व read more >>