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थोड़ा तु भी जिद्दी है
ये दीप थोड़ा तु जल थोड़ा मै पिघलता हूँ बस इतना रहम करना न तु बुझना न बुझने देना राह बहुत है मूशकिलो भरा कुछ जहरीला कुछ पथरीला बस एक करम
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रोने लगा है
कुछ तो बात है मोहब्बत मे बरना प्यार के लिए ताज महल कौन बनाता है कोई तो कीडा ज़रूर दफन है सिने मे जो मोहब्बत के आग लगाता है सायद मुझे �
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🌺 मनुष्य एक है🌼
🌺 मनुष्य एक है🌼 ब्राह्मण हो या शुद्र जन्म तुम्हारा एक है अच्छे कर्म कर मिलने वाला तुझे स्वर्ग है चंदन हो या कोई सामान्य वृक्ष की लकड
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औरत
ईश्वर के दिया हुआ आदमी को अनमोल भेट जो जाहिलों को भी इंसान बनाती जानवरों मे भी प्रेम जगाती भटके को राह देखाती जीवन मे रंग भर देती है
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बो प्यास अभी बाकी है
अभी इंतज़ार तेरा बाकी है जो सकूँ दे सके मेरी आँखों को बो प्यास अभी बाकी है पूरा सहर खामोश है खामोसियों में तुझ से मिलने को आश अभी ब�
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कन्फुज
मैं ता ति था थी रा री का कि ना नि हमेशा मुझे कन्फुज करता करती है इसलिए मैं जब भी कुच्छ लिखता हूँ बिना भेद भाव किये मैं ति और ता का प्र
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अच्छा मैं दर्पण हूँ
जब भी मैं देखता हूँ तुम्हे तो खुद को भी देख लेता हूँ पर ये क्या तेरी प्रतिमा और मेरा आकार तेरा चेहरा और मेरा ऐहसास गरम गरम सांसे और �
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पत्नी जी
पत्नी जी ने आज बडा ही प्रेम से सोते से जगाया . अपने मधुर मधुर बानी से कहा . क्यो आज काम पर नही जाना है कमा के नही लाना है. कमाओ गे नही तो �
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उल्झे है हम उल्झन मे
उल्झे है हम उल्झन मे सुल्झने का युक्ति नही उल्झन भि उल्झन जैसी सुल्झने का कोई उपायेनही ये उल्झे उल्झन से कब सुल्झेगे पता नही. अपन
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पराए तो पराए थे
पराए तो पराए थे कुछ अपने थे सो रुठ गये कुछ सपने थे सो टूट गये चुन चुन तिंका घर बनाया कुछ अँधियों में ठह गये और कुछ वारिस मे बह गये बक
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बातो ही बातो में
बाते हि बातों में ऑफिस के कुछ कागज़ो को खंघाल रहा था कुछ को छाट तो कुछ को फाड़ रहा था बो एका एक आ गये मेरे आखों के सामने बातो ही बातो म�
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मच्छर
यह है एक मच्छर जो है बहुत खच्चर जो बिना बुलाए आते हैं दवाई दे के जाते हैं दवाई लेना काम नहीं मिलता उनसे आराम नहीं दवाई ऐसी होती है मिल�
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