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नीड़
नीड़ बनाऊँ में केसे नेह का आहवान पाऊँ में केसे/ बनाता हूँ नीड़ बार-बार नेह आता है एक बार, फिर उठी आँधी ऐसी छा गये गगन में बादल ऐसे, नीड़ बन
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दुष्टों पे बार
माँ धरती के पुत्र हूँ धर्मराज के दुत हूँ समय रहते रुक जाओ नही तो बहुत कुछ हूँ बैसे तो मेरे ताकत के अन्दाजा सब को है जो लोग मुझे भूल ग�
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अनाथ और बेसहारा- उस मासूम का दर्द जो सड़क किनारे फुटपाथ जीवन जी रहा है
अनाथ और बेसहारा उस मासूम का दर्द जो सड़क किनारे फुटपाथ पर जीवन जी रहा है खाना मांगू तो सबको,चोर नजर आता हूं। पैसे मांगू तो हरमखोर,नजर
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हैप्पी रोज डे
गुलाब तो गुलाब होता है खूबसूरत और लाजवाब होता है हर पत्ती की खुशबू जहन में एहसास सुन्दर कराती बखूबी से निराश मन को भी महकाती खिलता कम�
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स्वर कोकिला लता दीदी
ऐसी परम् आत्मा आप महान थीं, भारत देश के आप मान थीं। आपके अकस्मात निधन ने, संपूर्ण विश्व को रुला दिया है। भारत ने अपनी अद्भुत, कोहिनूर �
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शिकायत
सोचती हूं आपसे आपकी ही शिकायत कर दू मन में उठते हजारों सवालों के जवाब ले लूं मैं अपने दिल के सभी हालात कह दूं चुप रहकर बनती नहीं है
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बसंत ऋतु
बसंत ऋतु आई है जीवन में कुछ रंग भरने आई है कुछ नए गीत गुनगुनाने आई है कुछ भूली बिसरी यादें सुनाने आई है चारों तरफ फैली है हरियाली �
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कृष्ण अर्जुन
देश द्रोपदी सी ड़री सकपकाई घबराई दुशासन नीडर सा धुम रहा राजा धृतराष्ट्र सा लाचार है दुर्योधन बे खौफ हो घुम रहा प्रजा को पांडव समझ �
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दिल मे तुफान सा उठने लगा है
चित्र बदल रहा या फिर चरित्र समझ मे आता नही ये तस्विर सुना है कीसि से की देश बदल रहा क्या मैं अंधा हो गया हूँ कुछ दिखता नहीं अभी अभी त�
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ये अटल हिन्दुस्तान रहेगा
कदम से कदम मिला के चलो बक्त अपने आप हार जायेगा समय पिछे रहे ना रहे तु आगे जरूर निकल जायेगा जीत उसी को मिलेगी जिसके पैरो मे रफ्तार ह
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जज्बात छोड आया हूँ
तु खड़की पे नही फिर भी गुलाब फेक आया हूँ ये दिल किस वेशर्मी पे उतर आया है जिधर जाऊ उधर तु ही तु दिखता हैं घर के दरबाजे पे छत पे गली क�
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कोई धोखा तो नही
तु जीद है मेरी की तुझे पा सकु अपने कल्पनाओं मे तुझे उडा सकु हर बक्त तु रहता है मुझ मे ही मैं एैसा क्या करू की तेरे दिल मे खुद को बसा स�
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