वतन में लोकतंत्र का राज है ;
छिपा कई राज़ हैंं ,
आ पड़ा चुनाव -
खड़ा अंचल के मीर ;
है पहलवान वीर ,
उम्मीदवार एक से एक बड़ा ;
यह पहलवान अपना ठप्पा read more >>
मत करो नारी पर जुल्म, स्वतंत्रता नारी का अधिकार ।
शायद ये सब भूल गए, है नारी से संसार।
इक रूप में नारी है माता, इक रूप में नारी धनदाता।
इ� read more >>
सांस की उलझी डोर है, मन भी हारा हुआ है;
होगा यही परिणाम अगर तो फिर अपना शान क्या हो?
हे ईश्वर! दे वो शक्ति-की ये जग वरदान सा हो।
अपने-अपनो � read more >>
ये आँख-आँख नही है, गहरा दरिया है,
नज़र बदले नही हैं, बस बदला नज़रिया है।
दुनिया के हर रहम में कुछ ख़ास छिपा है।
कहने को सब सही हैं, नही तो सभी � read more >>