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बुढ़ापे में माता-पिता का सम्मान करें
बचपन में जिन्होंने हर दर्द सह के अपने बच्चों को खुशी से पाला फिर क्यों बड़े होने पर तुम्हारा दिल इतना काला जिन्होंने तुम्हें हर परिस्�
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मां
मां शब्द सुनने में कितना अच्छा लगता है ना, अपनेपन का एहसास कराता है ना। प्यार तो सभी करते हैं इस जहां में, पर मां दुलार करती हैं ना।। स
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🙏 कृपा है तेरी माँ(वसन्त पंचमी)🙏
बालक था मैं उस समय , आन्ध्कार मे ढका था जीवन । प्रकाश लेश मात्र ना था , खो रहा था श्वाशन । आन्ध्कार मे बैठ , उजाला कि कल्पन�
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उपेक्षित
क़दर करो उनकी, जिनको उपेक्षित कहते हैं। बनकर के ख़ामोश जनाज़ा, सब कुछ सहते रहते हैं। वे सब की जानें, उनकी जाने न कोई। जो उनकी जान ले, वो �
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माँ जैसी कोई नहीं
माँ जैसी कोई नहीं लोरी गा सुलाने बालि प्यार से खिलाने बालि सही राह दिखाने बालि बला दूर भगाने बालि हमारी गलतियों को माफ़ करने बलि अ�
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कालचक्र के चक्र में
ये बक्त नहीं है रुकने का समय नहीं है झुकने का ये काल के पुकार हैं अवसर नहीं हैं टूटने का मौका बनाओ चल पड़ो अभी फुरशत नहीं सोचने का का�
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अमर है उसकी कहानी
इस मिट्टी की गाथा कैसे गाऊं, अनंत है इसकी गाथा। अनंत है इसकी कहानी। जो शहीद हुए इस देश के लिए , अमर थी उसकी जवानी। इस मिट्टी में ज
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अर्ध्नेशवर
मैं भी तो आप के जैसा बस थोड़ा सा अधूरा नर नारी दोनों मैं मेरे पास भी दो ऑंखें दो हाथ दो पैर सूरत भी आप से मिलता फिर काहे तू भागे हम से
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इश्क़बाज़
इश्क़बाज़ सुना हैं तू मुझ पे मरने लगी हैं मेरे ही नाम के माला जपने लगी ये हकीक़त हैं या कोई फ़साना तो नहीं सुना आज कल खूब तू सवरने लगी हैं
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मैं सैनिक हूँ
मैं सैनिक हूँ देश के रक्क्षक मैं सैनिक हूँ मैं देश की सुरक्क्षा करता हूँ सरहद के निगहबानी करता हूँ मेरे भी अपने हैं अपने भी कुछ सपने
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अभीष्ट सिद्धि
अनुराग प्रेम भक्ति लिए शहर शहर भ्रमण करता हूँ करुणा त्याग परित्याग किए जन जन को राग सुनाता हूँ सह सहमति अभीष्ट सिद्धि से जो गरीबी �
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इंडिया
नफ्रात बुरी है ना पलो इसे ,दिल में खालिश है तो हटा लो इसे, न तेरा ना मेरा हम सबका है ये वतन मिलकर संभालो इसे
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