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लौट आते है
चलो हम अपनी भारतीय संस्कृति में फिर लौट आते है,डैड को बाबूजी बनाते है,दादू को बाबा बनाते है, फ्रेंड को दोस्त बनाते है, फिर दोस्तो के साथ
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नव-वर्ष
नव वर्ष आ रहा है, धूम मचा रहा है। इस नव वर्ष चलो नए रंगों में रंगते हैं, परिंदों के संग उड़ते हैं। नव वर्ष आ रहा है, मुस्कान लुटा रहा है�
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गहनता का परिचय
स्तब्ध हूं निशब्द नहीं गहनता का हूं परिचय खोज ले जो मुझ में मैं को कीर्तिमान का हो उदय!! मैं भी मैं हूं तुम भी मैं हूं मैं का है इतना स
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कौन
दिल के दर्द बताता है कौन है अपना और पराए कौन कौन याद करें वह पुराने दर्द जख्म भी हरे हैं इस दिल को समझाए कौन अब कुछ सुकून मिला है उस
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नौजवा
ये जो नौजवा मयखाने से चलते मचलते आते है वो भारत की संस्कृति को नहीं अपने मा बाप की संस्कार को दर्शाते है ,ये जो नौजवा सिगरेट पीकर धुआं उ�
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जीवन की पहिया
हमने जीवन की पहिया को चढते उतरते देखा है,नन्हे दीपक की प्रकाश को हमने अंधकार हरते देखा है,कामयाबियों की दौर में इंसान को इंसान से जलते �
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मौसम
पल-पल में बदलता है मौसम थल-थल पे बदलता है मौसम कहीं चले तेज हवाएं, कहीं बारिश की फुहार। मौसम बदलता है रंग, हर रोज दिखाता एक नया ढंग। हव
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बूढ़ी औरत-बेला की मार बुरी औरत कितनी बूढ़ी
बूढ़ी औरत - बेला की मार बुरी ; औरत कितनी बूढ़ी , करती दिवा में मजदूरी - गिट्टी बिछाती रेल पट्टी में - कर्म - भू बुटीबोरी ; कौन छीना रोटी - भात ,
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समर्पण भाव
आरंभ हो चुका है अंत का अनंत में जो व्याप्त है, शंखनाद उल्लास है जगी ये कैसी प्यास है, भाव विभोर हो चुकी हृदय में उठती टीस सी, बस नयन छलक �
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बर्फ़ वाला आ गया।
बर्फ़ वाला आ गया। अब गली में शोर होगा भौंपू भौंपू ज़ोर होगा लो, पकड़ ली ज़िद उन्होंने सभी बच्चे लगे रोने बालक और माता सभी का आज मन हर्षा ग�
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सुन तो लो
शब्द या व्यक्ति से प्यार है चुन तो लो और फिर कुछ नियम कायदे बुन तो लो बाँस हूँ मैं या हूँ बाँसुरी , बाद में सोचना किन्तु पहले मुझे सु
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आवड
का तूमची इतकी आवड.. तुमची आवड मला इतकी का माझ मलाच कळत नाही तुम्हाला हजार वेळा बघूनही मन माझ भरत नाही तूमचा सुंदर चेहरा मनात माझ्या
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