एक दिन अकेला बैठा था में ना कोई नाम था मेरा न थी कोई पहचान l
सोच रहा था क्या करूंगा क्या बनूँगा अपने मकसद से था बिलकुल अनजान ll
नदी के परव� read more >>
न जाने आज कितनों को चाँद के आने का इंतजार है,
चाँद भी आज इतनी आसानी से प्रकट होने को नहीं तैयार है ,
चाँद को भी पता है की हमेशा उसका होता न read more >>
अबोध बालपन -
कितना नादान -
बड़ा होकर बनू किसान ;
यहीं सोचता रहा -
एकाग्रता से पिता का श्रम देखता रहा -
मेरा नादान बालपन सपना सजाता रहा -
बा� read more >>
त्याग ,तपस्या,तपोभूमि का वासी पूछ रहा हूं मैं ,
हर-हर चुमी थी जिसने फांसी उसी देश का वासी पूछ रहा हूं मैं ,
डम डम वाले डमरू से कैलाशी पूछ र read more >>
//...तस्वीर…//
एक आईना ,
जो जैसा दिखता
वैसा ही ,
तस्वीर बनाता सबकी…!
मगर ,
जब टूट जाता है
तब ,
नहीं बना पाता
खुद अपनी….!
चिन्ता नेताम &rd read more >>