मैं, हर उस शख़्स को, नमन करता हूं।
उस बेटे को, जो बुढ़ापे में, मां-बाप से बतलाता है।
उस भाई को, जो भाई को, भाई कहकर बुलाता है।
उस पति को, जो प� read more >>
//...मन का पंछी...//
दिल का भोला,
तन का छोटा
रंगत इसका ,
तितली जैसा है...!
कभी यहां ,
फुदकता रहता
कभी यहां ,
से उड़ जाता है...!
जहां मिला है ,
दान� read more >>
मेरा घमंड तोड़ दो,
बना लो अपना चरण दास,
मैं अन्यायी बन-बन दर-दर भटक रहा,
तेरी ओर तनिक न झाँक रहा,
मेरे दुष्कर्म को क्षमा कर,
बना ले मुझको अप read more >>
आगे बढ़ने की चाह !
और पीछे जा रहा है !!
आदम से आदमी !
आदमी से सभ्य !!
सभ्य से आदम !
हुआ जा रहा है !!
आदम का यह कारवां !
चांद पर जा रहा है !!
रफ़्� read more >>