//...मजहबी उन्माद...//
मानव मस्तिष्क के ,
एक कोने में,
जमा हुआ मवाद ...!
सारे मानव समाज को ,
सड़ाता, गलाता घाव
मजहबी उन्माद....!
मरती माताएं ,
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पेड़ की छांव में सुख मिलता , पेड़ की छांव में सुख मिलता ।
पेड़ हमें है छांव देते ,
सभी पंछी पेड़ पर है बैठते ।
पेड़ की छांव में सुख मिलता , � read more >>
काठ की नाव तू बढ़ता चल,
दो चार पथिक ले अपने संग,
जिसका न अपना मंजिल पथ,
फैला सागर का गहरा जल
बने रुकावट लहरें हर पल |
काठ की नाव तू बढ़ता च read more >>
काठ की नाव तू बढ़ता चल,
दो चार पथिक ले अपने संग,
जिसका न अपना मंजिल पथ,
फैला सागर का गहरा जल
बने रुकावट लहरें हर पल |
काठ की नाव तू बढ़ता च read more >>
जीवन जीने का यदि हो उमंग,
दु:ख भी भर देता जीवन में रंग,
है काम कौन कर सके न नर
आलस्य त्याग चल पड़े डगर,
सांसें भर कर हिम्मत कस कर,
पथ पर चल क read more >>
महंगाई का अजगर
रसोई को खा रहा है !
रसोई की थाली से स्वाद
रफ़्ता - रफ़्ता गायब हुआ जा रहा है !
महंगाई का अजगर
रसोई को खा रहा है !
पहले कोरो� read more >>
कांटों में पला बढ़ा जीवन
संग पत्ते बीच हरे-भरे,
कली से खिल कर फूल बना,
एक चुभ जाता
जो छूता मुझे,
एक रंग भरा
संग मेरे रंगों के,
वे सरल कठो� read more >>