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गलत हूं या सही हूं तुम मुझे बता दिया करो..! दोहराया ना जा सके इसलिए सज़ा दिया करो..! क्या है चेहरा मेरा जरा आईना मुझे दिखा दिया करो..! � read more >>
हे निसर्ग ! आकांक्षा नाही तुझ्या इच्छेनुसार सर्वोच्च असणे, आकाशात उल्का असणे, किंवा धूमकेतू जो उंच खूप उंच शकतो; फक्त एक झेफिर जो कमी read more >>
घर का खाना हजम नही होता आ जाते पडोसी ,ऐसा कुदरत ने बनाया करते कानाफुसी ऐसे समाज से बच रह भैया जो देख तरक्की करे ता ता थैय्या करत बुराई ख� read more >>
//...मजहबी उन्माद...// मानव मस्तिष्क के , एक कोने में, जमा हुआ मवाद ...! सारे मानव समाज को , सड़ाता, गलाता घाव मजहबी उन्माद....! मरती माताएं , read more >>
पेड़ की छांव में सुख मिलता , पेड़ की छांव में सुख मिलता । पेड़ हमें है छांव देते , सभी पंछी पेड़ पर है बैठते । पेड़ की छांव में सुख मिलता , � read more >>
उम्र के आख़िरी पड़ाव पर मुझे मिली पहचान है ! कोंई कहता कवि कोंई समझता शायर हम घर के कवि घर के ही शायर यह तुम्हारी मोहब्बतों की उड़ान ह� read more >>
जुनून है। तोह जीतोगे,। मुसीबत पर ,। मा का नाम लोगे,। दर्र कर आगे,। read more >>
जुनून है। तोह जीतोगे,। मुसीबत पर ,। मा का नाम लोगे,। दर्र कर आगे,। read more >>
काठ की नाव तू बढ़ता चल, दो चार पथिक ले अपने संग, जिसका न अपना मंजिल पथ, फैला सागर का गहरा जल बने रुकावट लहरें हर पल | काठ की नाव तू बढ़ता च read more >>
काठ की नाव तू बढ़ता चल, दो चार पथिक ले अपने संग, जिसका न अपना मंजिल पथ, फैला सागर का गहरा जल बने रुकावट लहरें हर पल | काठ की नाव तू बढ़ता च read more >>
जीवन जीने का यदि हो उमंग, दु:ख भी भर देता जीवन में रंग, है काम कौन कर सके न नर आलस्य त्याग चल पड़े डगर, सांसें भर कर हिम्मत कस कर, पथ पर चल क read more >>
महंगाई का अजगर रसोई को खा रहा है ! रसोई की थाली से स्वाद रफ़्ता - रफ़्ता गायब हुआ जा रहा है ! महंगाई का अजगर रसोई को खा रहा है ! पहले कोरो� read more >>
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