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मुक्तक ऐसे मत लगा इल्ज़ाम किसी निर्दोष पर। अगर आ गया जिस दिन वह रोष पर। जिन्दगी से तुझे मुक्त कर देगा निर्दोष वह- वचन देता ह read more >>
वे डूबे है तुझमें , तुम हो उनकी प्रिय हाला तेरे लिए बिछुडगें अपनो से , पर तुझसें न बिछुड़गें मधुशाला । read more >>
आवाज़ न करेंगे....! की अब मेरे अल्फाज तुझसे कुछ न कहेंगे... बेशक तेरा इंतज़ार करेंगे, पर तूझे आवाज़ न करेंगे... तोड़ंगे सारे मन के भ्र्म हम, की read more >>
अपने हक का यह त्यौहार आया है, चारों ओर प्रचार-प्रसार का कोलाहूल छाया है, देश में विकास करने का हक तुमने भी पाया है, तुमने अपने मत से देश � read more >>
मैं भारत हूँ.. मैं जात पात से ऊपर, प्रेम की परिभाषा हूँ. भाषाओं का श्रृंगार, युवाओं की अभिलाषा हूँ. मैं भारत हूँ.. मैं नदियों - सागर की read more >>
मुझे प्रेम हुआ.. तुम त्रेता की सीता हुई.. मैं कलियुग का राम हुआ.. तुम गंगा की बनारस हुई.. मैं अस्सी का घाट हुआ. तुम गीता की श्लोक हुई.. � read more >>
मेरा अधूरा प्यार... तुम्हारी स्नेह से बंधा मैं.. अब जांऊ कहाँ.. तुझ सा मीत मैं पांउ कहाँ तुम सा प्रीत अब लगे कहाँ.. सपनों के हर अंतिम र� read more >>
दीवाने हो जाओगे तुम भी, थोड़ा चखकर देखो तो हाला। वारूणी से हो जाएगा ,सरोकार तुम्हारा, फिर आवाजाही होगी , तेरे यहां मधुशाल� read more >>
उड़ के हवा क्या फरियाद लाती है, वक्त बेवक्त उसकी याद आती है। वो भूल गए, दिल में बो बबूल गए, किसी और को वो कर कबूल गए। जीने में न वो स्व� read more >>
"मां शारदे" मां शारदे तेरी कृपा चाहती हूं मैं लिखना चाहती हूं शब्दो के भंडार से कुछ शब्द चाहती हूं कलम में वीना की झनकार कविता में ते read more >>
"घर की याद" कितना भी करो आ जाती हैं घर की याद आ ही जाती हैं सुबह नहीं तो शाम को आ जाती हैं घर की याद आ ही जाती हैं घर की नहीं तो घरवालों � read more >>
मौसमी मेंढक, करते टर्र -टर्र। तनापाई पानी में, सर्र सर्र। पानी, ज़मीं दोनों कांपे, थर -थर। खुद, दूसरे बेचैन, सुन चर- चर। गया मौसम, वह� read more >>
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