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कानून का नूर
लीक- लीक कीक में, कभी-कभी रहती कमी। लीक से बेलीक ना होते, तो दुनिया रहती दबी थमी, असल नसल गई मसल, फल फूल रहा क़लमी, खुला दिमाग़ फले- फूल�
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विकसित भारत
तब से है गरीबों का विकास हुआ, स्वस्थ होने का सबको अभारत जब आजाद हुआ तब से है देश का विकास हुआ, दहेज प्रथा जैसी रिवाजों का विनाश हुआ बाल �
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भारत का इतिहास
रत ने भानया इतिहास बनाया, चंद्रयान को चंद्रमा पर पहुंचाया, सूर्य पर भी विजय पाएंगा। देश ने नया इतिहास रचा, भारत ने नया इतिहास रचा। कठ�
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पक्षी की चाह
पिंजरे में मुझे रखते हो बंद क्या मेरी कोई चाह नहीं? मेरे भी कई सपने है मेरे भी कई अरमान है। मुझे भी उड़ना नीले नभ में मुझे भी पीना नदिय
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मेरे दिल में हलचल सी मची है
मेरे दिल में हलचल सी मची है किसी की तलाश में मैं पागल सी खड़ी हूं जानूं ना मैं उसे फिर भी क्यों उसकी छवि मेरे आंखों में बसी है मेरे दिल
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अब ही सब
छूटा हुआ छोड़ गया, कल है कल की ओट। अब ही सब है, भूत, भविष्य की बांधता मोट। अब को ही साध ले, होगा विकास स्फोट। भूत, भविष्य सब लगाते, इसके
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📚 विद्दा हो! मधुर मादक्ता सा...🌧
हो! मधुर - मधुर मादक्ता सा, मदुम्य - मदलीन विभोर चले! चल - अचल, चाल - चंचलता का, विकट के निकट निज़ ज्ञान धरे!! व�
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आशीवार्द
आशीष सदा वो देती रहती है बच्चों पर प्यार लुटाती रहती है । अधरों को रखकर , भाल पर माँ जुग जुग जियो लाल , ये कहती है ।
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होत के चोचले
होत में होता, नानी का श्राद्ध। होत में दादा का, जन्मदिन आता याद। साल की लड़की की लड़की का, मायरा लेते लाद। ख़लक़ पहुंचता, काज़ी की क
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नजरेला नजर भिडवतां.!
नजरेला नजर भिडवतां.! नजरेने नजर चुकवली… निघण्याचा निर्णय उत्तम.! परतीची वाट निवडली… सोडूनी मी हात तुझे , एकांताची साथ निवडली. पुन्ह�
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प्रकृति प्रेम
मेरा आत्मा प्रकृति में समाया - द्रुमों के मृदु - छाया , कुकू - कुकू कोयल बुलाया , तो कहीं विहंगिनी ने - जीवन की अनमोल गीत सुनाया । छायावा
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मजदूर आज मजबूर है
राष्ट्र निर्माता मजदूर आज मजबूर है,दर –दर की ठोकरे खाकर घर से दूर है | न रहने का आशियाना न घर का ठिकाना,सब कुछ सहकर भी परिवार से दूर है|
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