"कल्पना की हवा-हवाई...
में कहां खो गए हम,
"कल्पना ए-मन की...
हवा-हवाई में खो गए हम,,
"ये तन हीरा मिला कहां...
ये मन के डगर खो गए हम,
"ये मेरा हुआ � read more >>
तू रहता कण-
कण में अविनाशी"!
"तू ही है तन-
मन में अविनाशी"!
"तेरे बिना जीवन-
का अस्तित्व ही क्या"!?
"तू ही जड़-
चेतन स्वयं विधाता"....!!!!
-मोती read more >>