"तू नहीं तो जीवन-
में एक सुना पन है"!
"लगता है ए-जहां-
में कहीं सुना पन है"!
"ये तुम्हारी याद-
अब दिल से जाती नहीं"!!
"कभी ये सरगम-
लिखा था क� read more >>
न जाने राही-
कितने इस राह पर...
एक कहानी-
बन जाते इस राह पर...
ज़िंदगी सुलझता-
नहीं उलझता जाता है यहां...
भटकता-
जीवन गुज़र जाता ए-कहां?...
-� read more >>
"जिंदगी के इस राह में-
युगों-युगों से चले आ रहे हैं"!
"ना जाने-
कितने ही मुसाफिर,
यहां भटकते आ रहे हैं"!
"देखो कोई-
ए-बिरला ही पहुंच,
पाता अ read more >>
ये, खावाईशो कि आंघीयाँ ले उडी़
बादशाहों की नींद,
और परिन्दों के घर........
दर-दर भटक रहै है। आज भी
मुहोबतों के वाशिन्दे ,
के, ऊमीद, मे उजड़ ग� read more >>