"ये तन को कभी-
दिल-ए-नज़र देखा ना था"
"मैं ज़िद पर-
अड़ा था अभिमान में पड़ा था"..!!
"बैठ पल भर-
गुरु वाणी सुनी सत्संग में"
"बसा है श्री-
हरि � read more >>
तमाम उलझनों को समेटे हम, चल दिए उस रह पर
जिसमे ना आगे मंजिल थी, ना रास्ता और ना तू
यू तो, खुद के अंजाम से रूबरू थे हम
पर कमबख्त, इस दिल को क read more >>