जीवन की-
धारा में बहता गया,,
कुछ इस-
तरह से बहता चला गया,
उस जहां में छलकते जाम
अमृत रस से भरे पड़े थे मैं
परमानंद के आगोश में था..!!
-मोती read more >>
लोग कहते हैं शहर में फिर से बरसात हो रही है
किसीसे ये मत कहना कि यह प्रकृति मेरे साथ रह रही है
एक कहानी थी जो अधूरी रह गई थी कभी
तनहा ही स read more >>