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दिल में एक दर्द सा उठा क्यों है? दिल ने किसी को याद किया क्यों? है हर तरफ महफिल में तुम्हारे ही चर्चे हैं ! तुम्हारे नाम के चर्चे से दिल read more >>
दरिया ज़िंदगी का- मैं गोता लगाता गया लगाता गया- और डूब इतना गया, जब होश संभाला तो अपने को परंम- आनंद के सागर में पाया मेरे चित् - में read more >>
जीवन की- धारा में बहता गया,, कुछ इस- तरह से बहता चला गया, उस जहां में छलकते जाम अमृत रस से भरे पड़े थे मैं परमानंद के आगोश में था..!! -मोती read more >>
अब वो भी नजरें चुराने लगे मुर्शद जो कभी कहते थे तुम बिन जिया तो फिर क्या जिया read more >>
मेरे आंसुओं की उसे परवाह नहीं हैं जिस शख्स के सिवा मुझे कोई दूसरी चाह नहीं है #गोपाल_पंडित read more >>
हे नीली छतरी वाले- हे शिव गुरु तू जगत का, करतार तू ही सबका तारणहार तेरी यह दुनिया- तुझसे छुपी कहां है, तू ही जाने तेरी अद्भुत कहानी मै read more >>
बेसुध बहे- संसार- सागर की धारा! बेसुध बह जाता- वह जो संभलना पाता सत्य की धारा- माया भी बहती जाती अमृत की धारा- विष भी बहती जाती जो र� read more >>
हसरतें दिल की दवी रह गई जुवान से न निकला लफ्ज़ कोई सपने तो थे सुनहरे क‌ई जो सपने में ही, कहीं खो ग‌ई। read more >>
र्मद पकाबे खाना, मेहरारू जोते खेत। भैया हो, बदल गइल बा जमाना।। read more >>
तू जान थी कभी अरमान थी कभी मेरी बुझती सासों की तू चीराग थी कभी तुझे चाहा था इश्क़ से ज्यादा पर मैं समझ न पाया तेरा इरादा इस लिए तू इश� read more >>
तू इश्क़ लगी विस्क लगी सच कहु तो प्रीत लगी तेरी बातों के मिठास में ना जाने क्यों मित लगी जब से मिला हैं शब्दों से शब्द ना जाने क्यों � read more >>
लोग कहते हैं शहर में फिर से बरसात हो रही है किसीसे ये मत कहना कि यह प्रकृति मेरे साथ रह रही है एक कहानी थी जो अधूरी रह गई थी कभी तनहा ही स read more >>
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