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सुबह का कोहरा
तेरी याद एक सुबह की कोहरे जैसी है पास होकर भी तू दिखता नही मुझे सामने होकर भी कोहरे में धुंधला सा दिखता है कब तक यूं ही धुंधला सा दिखेग�
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आते आते आज किसी की यादें पिछे छोड़ आया हु
आते आते आज किसी की यादें पिछे छोड़ आया हु कुछ बाते तो कुछ दिनो की मुलाकाते पीछे छोड़ आया हु किसी के चहरे की हंसी तो किसी के सपने तोड़ आय�
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जीने के लिए ही पी रहे है
मुश्किलों की जिंदगी जी रहे है जख्म खुद के खुद ही सी रहे है कोन कहता है शराब जानलेवा है हम तो जीने के लिए ही पी रहे है।। धरम सिंग राजपू
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शरीफो में चोर
शरीफो में कोई चोर नही होता सपनो में कोई और नही होता लाइब्रेरी में कोई शोर नही होता और जो हम से करे दोस्ती वो कभी बोर नही होता
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इश्क के दीवाने
ना चाहो फिर भी ये इश्क इंसान को दीवाना बना देता है अजीब खेल है ऊपर वाले का दिल तो देता है मगर धड़कन किसी और बना देता है
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रूठी जिंदगी
रूठी जिंदगी को मना लेंगे हम मिला जो गम वो सह लेंगे बस आप रहना हमेशा साथ हमारे तो निकलते हुए आँसुओ में भी मुस्कुरा लेंगे हम
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दोस्त बनकर
हम दोस्त बनकर किसी को रुलाते नही दिल में बसकर किसी को भुलाते नही हम तो दोस्ती के लिये जान भी दे पर लोग कहते है कि हम दोस्ती निभाते नही
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गौर करना मेरे अल्फ़ाज़
गौर करना मेरे अल्फ़ाज़ों की रोशनी में उसको अपनी सुखनवरी का साहब तालिब हो गया है वो। और अंदाजे गुफ्तगू की हकीकत न पूँछिये लगता है दौरे व
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अपना बनकर
अपना बनकर ऐसा लूटा हमें अब किसी अपने को भी अपना कहने की हिम्मत न रही मुझमें। धन्यवाद
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दिल पे
दिल पे जितनी ठेस लगी है उसे गिनने बैठें तो कोई हिसाब नहीं है पर जा हमने भी तुम्हें माफ़ किया क्योंकि तुम भी किसी गैर से कम नहीं हो। ध�
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जी तो हम आज भी रहे हैं
जी तो हम आज भी रहे हैं पर ऎ जीना भी कोई जीना है जिसमें जिंदा लाश बनकर रह गए हैं। धन्यवाद
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फ़िक्र
फ़िक्र तुम्हें होती होगी मेरी ,आज भी पर आज और कल के फिक्र में फासलें बहुत आ गई कल बेस्वार्थ फिक्र थी आज स्वार्थ छिपा है इस फिक्र में।
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