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शायरी
गरीबी
सुना हैं हर रोज़ गरीबी की बारिश में वो भीगता है, घर से कुछ ही दूर जिसकी छातो की दुकान हैं |
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क्रोध में स्वाहा हो जाता है
क्रोध में स्वाहा हो जाता है व्यक्ति का विवेक फिर मस्तिष्क में आते हैं अपराध के काम अनेक - त्रिशिका श्रीवास्तव ‘धरा’, कानपुर
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रब के घर
रब के घर देर है पर अंधेर नहीं तुम समझा करो तुम इतने क्यों परेशान हो थोड़ा धीरज रखा करो। धन्यवाद
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भरोसा
ईश्वर पे भरोसा कर सब ठीक हो जाएगा आज नहीं तो कल सबका उद्धार हो जाएगा। धन्यवाद
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कब क्या
कौन जानता है कब क्या हो जाए ऐ तो खुदा की मर्ज़ी है कब क्या कर जाए। धन्यवाद
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जिंदगी बहुत कुछ सिखा जाती हैं
जिन्हें हम अपना मानते हैं, वो भी हमें अपना समझे कोई जरुरी नहीं होता, कुछ दिखावा करते हैं अपनेपन का, हर कोई वेनकाब नहीं होता॥
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कुछ किया ही नहीं
जिंदगी इतनी मगरुर हो गई कि हमी से दगा कर गई हमने कुछ किया ही नहीं यूं ही बदनाम हो गई। धन्यवाद
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लागी लगन मत तोड़ना
लागी लगन मत तोड़ना, श्याम जी मुझे ना छोड़ना, दिल वसाया हैं तुमको, मुंह ना मोड़ना॥ जय श्री कष्णा
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Kresh kumar ahirwar
तेरी आवाज़ मेरी जरूरत तेरा प्यार मेरी आदत तेरी खामोशी मेरी सजा तेरी खुशी मेरी ज़िंदगी वो मेरी ना हुईं तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं �
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रहूं या न रहूं
मैं रहूं या न रहूं मेरी यादें साथ रहेगी खुश रहना तू जिदंगी में बस इतनी दुआ रहेगी । धन्यवाद
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लोगों के आंखों में
सच बोलती हूं इसलिए लोगों के आंखों में खलती हूं नहीं तो आज वही आंखे मुझे अपने सर आंखों पर विराजमान रखती। धन्यवाद
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सच और झूठ
सच और झूठ बोलने में बस इतना ही फर्क है झूठ बोलने वालों की वहा वाही और सच बोलने वालों की तबाही। धन्यवाद
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