न जाने ये कौन सा रास्ता मैंने ले लिया,
कदम भी अब तो थकने से लगे है,
लगा कभी तो यूँ, के मंजिल बस करीब है,
पर अब तो ये शब्द भी चुभने से लगे है| read more >>
मैंमैं हर गम से जार-जार हूँ।
क्योकि खफा खुद से में आज हूँ।
खुशियाँ ही खुशियाँ है इस जहा में यहाँ।
फिर भी आज मैं उदास हूँ।
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असतीन मे तो हमारे पाले हूवए सॉप पलते है! अजी असतीन में तो हमारे पाले हूवए साँप पलते है! और वह तो इसलिए पलते कियो कि उनहे हम पालते है!
नही � read more >>